RTI में 16 हजार बच्चों के भविष्य पर संकट, हाईकोर्ट ने किया शिक्षा सचिव से जवाब तलब

RTI में 16 हजार बच्चों के भविष्य पर संकट, हाईकोर्ट ने किया शिक्षा सचिव से जवाब तलब


सीजी न्यूज ऑनलाइन, 05 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार के तहत प्राप्त हजारों आवेदनों के अधूरे सत्यापन को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। शनिवार को अवकाश के दिन विशेष बेंच में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई और शिक्षा सचिव से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की गई है।

राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन आरटीई के तहत कक्षा पहली में प्रवेश के लिए आए आवेदनों का सत्यापन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। कुल 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 यानी करीब 62 प्रतिशत का ही सत्यापन हुआ है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कई जिलों में तो यह प्रक्रिया 10 प्रतिशत से भी कम पूरी हुई है।

लोक शिक्षण संचालनालय ने 16 फरवरी से 31 मार्च तक पंजीयन और सत्यापन की समय-सीमा तय की थी, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के चलते यह काम अधूरा रह गया। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि अभिभावकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जो अस्वीकार्य है।

नियमों के मुताबिक 13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी के जरिए स्कूलों का आवंटन होना है, लेकिन सत्यापन अधूरा रहने से इस प्रक्रिया में देरी तय मानी जा रही है। हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव के रवैये पर भी नाराजगी जताते हुए विस्तृत शपथ-पत्र पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें कोर्ट के पूर्व निर्देशों के पालन, वर्तमान अव्यवस्था और मीडिया रिपोर्ट्स पर स्पष्टीकरण देना होगा।

मामले में 2016 से लंबित एक जनहित याचिका सहित 12 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। भिलाई निवासी सी.वी. भगवंत राव द्वारा दायर याचिका में आरटीई के तहत सीटों में कटौती और प्रवेश प्रक्रिया में देरी का मुद्दा उठाया गया है।

इसके अलावा निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोतरी, सीबीएसई मान्यता को लेकर गुमराह करने और शिकायत करने वाले अभिभावकों को डराने जैसे आरोप भी जुड़े हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य में कक्षा पहली के लिए निजी स्कूलों में 85,000 सीटें आरक्षित होनी थीं, लेकिन पोर्टल पर केवल 55,000 सीटें ही दिखाई दे रही हैं। 30,000 सीटें कम क्यों हुईं और किसके आदेश से, इस पर भी कोर्ट ने जवाब मांगा है।