पिता नहीं बन पाए डॉक्टर तो बेटे ने शिशु रोग विशेषज्ञ बनकर पूरा किया परिवार का सपना, पढ़ें पिथौरा के डॉ प्रदीप कुमार विशाल की सफलता की कहानी

पिता नहीं बन पाए डॉक्टर तो बेटे ने शिशु रोग विशेषज्ञ बनकर पूरा किया परिवार का सपना, पढ़ें पिथौरा के डॉ प्रदीप कुमार विशाल की सफलता की कहानी


पिता नहीं बन पाए डॉक्टर तो बेटे ने शिशु रोग विशेषज्ञ बनकर पूरा किया परिवार का सपना, पढ़ें पिथौरा के डॉ प्रदीप कुमार विशाल की सफलता की कहानी

भिलाई नगर 1 जुलाई । महासमुंद जिले के पिथौरा के रहने वाले डॉ. प्रदीप कुमार विशाल के पिता  डॉक्टर बनना चाहते थे लेकिन जानकारी के अभाव और पारिवारिक परिस्थिति के कारण वे डॉक्टर बन नहीं पाए। पिता के अधूरे सपने को जानकर बेटे प्रदीप ने प्रण लिया कि वे डॉक्टर बनकर पूरे परिवार का गौरव बनेंगे। 12 वीं बोर्ड के बाद जब मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू की तो लगातार दो साल मिली असफलता ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। ऐसे में बेटे ने टूटते हौसले को बनाए रखने के लिए अपने आप को सेल्फ मोटिवेट किया। खुद को संकल्प लेकर ये भरोसा दिलाया कि तीसरे 

साल मेरी मेहनत जाया नहीं जाएगी। इस बार एमबीबीएस में जरूर सलेक्शन होगा। अपने दृढ़ विश्वास और कड़ी मेहनत के चलते साल 2007 में आखिरकार प्रदीप ने सीजी पीएमटी क्वालिफाई कर लिया। जिंदल हॉस्पिटल में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. प्रदीप कहते हैं कि निराशा हर किसी को होती है। इस निराशा को कभी भी खुद पर हावी होने नहीं देना है। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। हो सकता है आपको थोड़ी देर में सफलता मिले बस जरूरत है अपने आप पर भरोसा करने की।  

सीनियर और दोस्तों से पता चला मेडिकल एंट्रेस की होती है कोचिंग

डॉ. प्रदीप ने बताया कि स्कूल के दिनों में मेडिकल एंट्रेस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। स्कूल के कुछ सीनियर्स और दोस्तों से पता चला कि बड़े शहरों जैसे रायपुर और भिलाई में मेडिकल एंट्रेस की कोचिंग होती है। साथ ही उनसे ये भी पता चला कि पीएमटी के अलावा और कई संस्थान अलग से एमबीबीएस में दाखिले के लिए एग्जाम कराते हैं। इस तरह थोड़ी बहुत जानकारी जुटाकर मैं कोचिंग करने के लिए भिलाई पहुंच गया। गांव के स्कूल से पढऩे के कारण बेसिक का तो बुरा हाल था। पहला ड्राप इयर बेसिक को स्ट्रांग करने में निकल गया। उसी साल मेरे साथ पढऩे वाले सीबीएसई बोर्ड के कई स्टूडेंट का चयन भी हो गया। अपनी असफलता की तुलना उनके सफलता से करके मैं काफी निराश हो गया था। 

कोचिंग में मिला मोटिवेशन, ड्रॉप लेकर दिया खुद को चांस

सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से मेडिकल एंट्रेस की कोचिंग करने वाले डॉ. प्रदीप ने बताया कि कोचिंग में कई स्टूडेंट को दूसरा, तीसरा और चौथा ड्रॉप लेकर पीएमटी की तैयारी करते हुए देखा। यहां टीचर्स भी पहले प्रयास में असफल हुए बच्चों को ड्रॉप लेकर एक और चांस लेने के लिए मोटिवेट करते थे। इसलिए मैंने भी ड्रॉप लेकर खुद को एक और चांस दिया। इस दौरान सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ड्रॉपरों को काफी मोटिवेट करते थे। उनकी मोटिवेशनल बातें दोगुनी मेहनत करने की इच्छाशक्ति जगा देती थी। सचदेवा की यही बात उसे बाकी संस्थानों से अलग बनाती है। यहां का माहौल भी बहुत अच्छा है। टीचर्स हर स्टूडेंट पर बराबर ध्यान देकर उनके वीक प्वाइंट को स्ट्रांग करने की कोशिश करते हैं। टेस्ट सीरिज में एक साथ हजारों बच्चों के साथ बैठकर अपनी तैयारी को परखने का मौका मिलता है। 

टाइम टेबल बनाकर पढ़ें

नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप शुरुआत से ही टाइम टेबल बनाकर पढ़े। अपने टाइम टेबल के हिसाब से कैलकुलेशन भी करें।  जब निराश हो तो किसी टीचर या फिर काउंसलर की हेल्प लेकर उस दौर से बाहर निकलने की कोशिश करें। हार कभी न माने क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती इस बात को अपने दिमाग में अच्छे से बैठाकर रखें।