कार्य की अधिकता एवं अवकाश की कमी पुलिस कर्मियों को बना देती है चिड़चिड़ा, डीयू में छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था तथा बस्तर की आदिवासी संस्कृति पर हुए दो पीएचडी वायवा

कार्य की अधिकता एवं अवकाश की कमी पुलिस कर्मियों को बना देती है चिड़चिड़ा, डीयू में छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था तथा बस्तर की आदिवासी संस्कृति पर हुए दो पीएचडी वायवा


दुर्ग 17 मई । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था के दो दशक दुर्ग जिले के विशेष संदर्भ में विषय पर कला संकाय के इतिहास विषय से संबंधित प्रथम पीएचडी वायवा में शोधार्थी नरेश कुमार पटेल ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया। यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय की पीएचडी सेल प्रभारी, डॉ. प्रीता लाल ने बताया कि शोधनिर्देशक सेवा निवृत्त प्राध्यापक, डॉ. किशोर कुमार अग्रवाल तथा सह शोधनिर्देशक, साइंस कॉलेज, दुर्ग के सहायक प्राध्यापक, डॉ. अनिल कुमार पांडे के मार्गदर्शन में किये गये शोधकार्य को प्रस्तुत करते हुए नरेश पटेल ने छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था सन् 2000 से 2020 तक दुर्ग जिले के विशेष संदर्भ के रूप में गहराई से विश्लेषण किया। नरेश पटेल ने पुलिस विभाग में जारी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि कार्य का अत्याधिक दबाव एवं अवकाश की कमी कई बार पुलिस कर्मियों को चिड़चिड़ा बना देती है। दोनों पीएचडी वायवा में बाह्य परीक्षक के रूप में केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर के प्राध्यापक, डॉ. बी. के. श्रीवास्तव ऑनलाईन रूप से उपस्थित थें।


डॉ. लाल के अनुसार आज आयोजित द्वितीय पीएचडी वायवा में विश्वविद्यालय स्थित टैगोर हॉल में शोधार्थी जितेन्द्र कुमार साखरे ने अपने शोधनिर्देशक, डॉ. अनिल कुमार पांडे के मार्गदर्शन में बस्तर की आदिवासी संस्कृति पर आधुनिकता एवं विकास का प्रभाव तथा पर्यावरणीय सम्पोषणीयता एक ऐतिहासिक विश्लेषण विषय पर 1960 से 2015 तक की अवधि का विश्लेषण किया। जितेन्द्र साखरे ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में संधृत विकास की आवश्यकता है क्योंकि अनेकों जगह पर विकास कार्यों के कारण प्राचीन जनजाति सभ्यता एवं रीति-रिवाज, त्यौहार एवं पारंम्परिक धार्मिक स्थलों पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है। दोनों पीएचड वायवा में उपस्थित कुलपति, डॉ. अरूणा पल्टा तथा सभागार में उपस्थित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी, आदि ने ऑनलाईन तथा ऑफलाईन रूप से प्रश्न पुछकर जिज्ञासा को शांत किया।


डॉ. प्रीता लाल ने बताया कि इतिहास विषय के इन दोनों पीएचडी वायवा में कुलसचिव, श्री भूपेन्द्र कुलदीप, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, उपकुलसचिव, डॉ. राजमणि पटेल, वित्त अधिकारी, सुशील कुमार गजभिये, कीड़ा संचालक, डॉ. दिनेश नामदेव, राजेन्द्र कुमार चौहान, सहायक कुलसचिव, डॉ. सुमीत अग्रवाल, हिमांशु शेखर मंडावी, दिग्विजय कुमार, इतिहास विषय के अध्ययन मंडल के अध्यक्ष, डॉ. पी. डी. सोनकर, वाणिज्य संकाय के डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा, डॉ. जांगड़े, इतिहास विभाग पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के डॉ. खुंटे, साइंस कॉलेज दुर्ग की डॉ. ज्योति धारकर, डॉ. कल्पना अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में ऑनलाईन तथा ऑफलाईन रूप से प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित थे।