🛑“यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है” – प्रधानमंत्री ने वीर जवानों के त्याग, शौर्य और समर्पण को किया नमन
🛑नक्सली आतंक का अंत, विकास की बहार शुरू; जवानों के बीच पहुंचे पीएम मोदी ने कहा– यह जीत आपके साहस और दृढ़ संकल्प की है
सीजी न्यूज ऑनलाइन, 08 नवंबर 2026। दीपावली के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ त्योहार मनाया। जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ दशकों तक चली लड़ाई में सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की वह धरती, जहां कभी नक्सली आतंक का कहर था, आज जवानों के त्याग और तपस्या के कारण शांति एवं विकास की नई राह पर आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने जवानों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में तैनात सैनिक एवं सुरक्षा बल के जवान उनके परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से जवानों के त्याग, समर्पण और सेवाभाव के प्रति आभार व्यक्त किया।

2026 की दीपावली को बताया ऐतिहासिक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 की दीपावली विशेष है। दशकों पुरानी नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ लड़ाई में देश ने जीत हासिल की है। उन्होंने इसे एक असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय लाखों वीर जवानों, सुरक्षा कर्मियों और उनके परिवारों को जाता है।
उन्होंने कहा, “यह पहली दिवाली है, जब देश नक्सलवाद-माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई जीत चुका है। यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि बस्तर में नक्सली आतंक का कहर समाप्त होने के साथ विकास की बहार शुरू हो गई है।
जवानों के बलिदान को किया याद
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष के दौरान शहीद हुए जवानों और निर्दोष नागरिकों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। नक्सली आतंक के कारण शाम होते ही लोगों का जीवन ठहर जाता था और नागरिकों के मतदान जैसे लोकतांत्रिक अधिकार भी प्रभावित होते थे।
उन्होंने दंतेवाड़ा में वर्ष 2010 में हुए नक्सली हमले का उल्लेख करते हुए 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत को याद किया। इसी वर्ष दंतेवाड़ा में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ही एक हजार से अधिक जवानों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना बलिदान दिया। कई जवान आईईडी विस्फोटों में गंभीर रूप से घायल हुए और अपने अंग गंवाए।
2014 के बाद बदली रणनीति और परिस्थितियां
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में रणनीति, नीतियों और राजनीतिक इच्छाशक्ति में बदलाव आया। सुरक्षा बलों को आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई तथा नक्सलियों की आर्थिक गतिविधियों, फंडिंग और हथियारों की आपूर्ति पर प्रभावी प्रहार किया गया।
उन्होंने कहा कि नक्सली संगठनों की आर्थिक कमर तोड़ने के साथ उनकी सप्लाई लाइन, मूवमेंट और भर्ती गतिविधियों पर भी लगाम लगाई गई।
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के साहस और संयम की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की सही नीतियों और दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत है।
आंतरिक सुरक्षा मजबूत तो बाहरी दुश्मन भी कमजोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होना बेहद जरूरी है। जब देश भीतर से सुरक्षित और मजबूत होता है, तो बाहरी दुश्मन भी प्रभावी नहीं हो पाते।
उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी, राज्य पुलिस, बस्तर फाइटर्स और महिला सुरक्षा कर्मियों के योगदान की विशेष सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा में सुरक्षा बलों ने अनगिनत बलिदान दिए हैं। करोड़ों देशवासियों को अपने वीर जवानों पर गर्व है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा अभियान नहीं थी, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने का भी प्रयास था।
उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 15 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई गईं, साढ़े नौ हजार से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए और आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए करीब 175 एकलव्य विद्यालय खोले गए।
इसके अलावा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगभग 50 आईटीआई और करीब 50 कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए। दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में डाकघर, बैंक शाखाएं, एटीएम तथा पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए गए।
प्रधानमंत्री ने पीएम जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने विशेष रूप से पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर ध्यान दिया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं।
गरीबों के कल्याण से बदली तस्वीर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में गरीबी उन्मूलन और जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं।
उन्होंने जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना, स्वनिधि योजना, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन, स्वच्छ भारत मिशन और हर घर जल जैसी योजनाओं को गरीबों के जीवन में बदलाव का आधार बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीबों को मुफ्त दवाई, मुफ्त पढ़ाई और मुफ्त रसोई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों से लोगों के जीवन में आत्मविश्वास बढ़ा है।
बस्तर ओलंपिक का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने बस्तर में हो रहे बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में बदलाव की तस्वीर अब स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर के बच्चे बंदूक नहीं, बल्कि खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।
उन्होंने इसे शांति, विश्वास और विकास की दिशा में बढ़ते बस्तर का प्रतीक बताया।
नक्सलवाद का खतरा पूरी तरह खत्म मानकर न रहें
प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा बलों को सतर्क रहने का संदेश देते हुए कहा कि नक्सली हिंसा के खिलाफ मिली सफलता के बावजूद खतरा पूरी तरह समाप्त मानकर नहीं चलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिंसा और नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहना होगा तथा संविधान और लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत करना होगा।
विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि नई उड़ान का मंच है। अब देश को गरीबी मुक्त, नशा मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ना है।
उन्होंने जवानों के त्याग और परिश्रम को विकसित भारत की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि देश जिस संकल्प को लेता है, उसे पूरा करने का सामर्थ्य भी रखता है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सुरक्षा बलों और उनके परिवारों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं तथा भारत माता की जय और वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ अपना भाषण समाप्त किया।


