एक ही परिवार पर आठ फर्जी आपराधिक मामले, हाईकोर्ट ने सभी पर कार्रवाई रद्द की

एक ही परिवार पर आठ फर्जी आपराधिक मामले, हाईकोर्ट ने सभी पर कार्रवाई रद्द की


🔴 भिलाई दुर्ग सहित अलग-अलग थाने में दर्ज थे मामले, चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अदालत ने किया हस्तक्षेप,

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 26 अगस्त 2026। एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज आठ आपराधिक मामलों को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए सभी मामलों की आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों को समग्र रूप से देखने पर अभियोजन जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के समान होगा।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। वर्ष 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ रायपुर, दुर्ग, भिलाई और मुंगेली क्षेत्र के अलग-अलग थानों में कुल आठ मामले दर्ज किए गए थे।

मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी जांच में सभी आठ मामलों को फर्जी पाया। जांच में संबंधित विवेचक की लापरवाही भी सामने आई है। इसके बाद उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

मामले की शुरुआत 2019 में रायपुर के मौदहापारा थाने में अपराध क्रमांक 107/2019 से हुई। इसके बाद दुर्ग के कुम्हारी थाने में 192/2019 और पुरानी भिलाई थाने में 412/2020 दर्ज हुआ। वर्ष 2021 में मुंगेली क्षेत्र में अपराध क्रमांक 14/2021, 58/2021, 243/2021 और 328/2021 सहित कई मामले दर्ज किए गए।

इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471/34 सहित अन्य प्रावधान लगाए गए थे। एक मामले में चार्जशीट और पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी थी तथा मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मुंगेली की अदालत में लंबित था।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सभी मामले एक ही विवाद से जुड़े थे और बाद के मामलों में शिकायतकर्ता भी पहले मामलों से जुड़े लोगों के संपर्क में थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों को उस समय गिरफ्तार बताया गया, जब वे पहले से ही जेल में थे।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार परिवार की एक महिला की पहचान पीयूष तिवारी नामक व्यक्ति से हुई थी। आरोप था कि उसने खुद को अविवाहित पुलिस अधिकारी बताते हुए विवाह का वादा किया। बाद में उसके पहले से विवाहित होने की जानकारी मिलने पर महिला ने संबंध समाप्त कर दिया और 5 अप्रैल 2018 को बिलासपुर स्थित आर्य संस्कार केंद्र में दूसरे व्यक्ति से विवाह कर लिया।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी पीयूष तिवारी महिला पर संबंध बनाए रखने का दबाव डालता रहा और निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी दी। इसके बाद महिला, उसके पति और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर मामले दर्ज होते गए।

राज्य सरकार की ओर से 8 अगस्त 2024 को दाखिल हलफनामे में बताया गया कि रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने 30 जून 2024 को डीजीपी को भेजी रिपोर्ट में सभी आठ मामलों को फर्जी बताया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल हो जाने मात्र से एसआईटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट की शक्ति केवल इसलिए समाप्त नहीं हो जाती कि अभियोजन में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। यदि बाद की आधिकारिक जांच से स्पष्ट हो कि मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, तो हाईकोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।