अंतरजातीय विवाह पर DSP के परिवार का बहिष्कार, हाईकोर्ट ने फटकारा- कोई समाज संविधान से ऊपर नहीं

अंतरजातीय विवाह पर DSP के परिवार का बहिष्कार, हाईकोर्ट ने फटकारा- कोई समाज संविधान से ऊपर नहीं


🔴 पुलिस पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए आरोपियों ने दायर की थी याचिका

सीजी न्यूज ऑनलाइन 05 अगस्त। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरजातीय विवाह करने वाले डीएसपी डॉ. मेखलेंद्र प्रताप सिंह को समाज से बहिष्कृत करने की कोशिश को न सिर्फ गलत बताया, बल्कि याचिका लगाने वालों को कड़ी फटकार भी लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को निजी जीवन जीने का अधिकार देता है, कोई भी समाज इस अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सतगढ़ तंवर समाज की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया और इसे असंवैधानिक, अमानवीय और दुर्भावनापूर्ण बताया।

डीएसपी डॉ. सिंह वर्तमान में कांकेर जिले में नक्सल ऑपरेशन में तैनात हैं और बिलासपुर के सकरी स्थित आसमा सिटी में निवास करते हैं। उन्होंने सरगुजा जिले के बरगवां गांव की एक युवती से प्रेम विवाह किया, जो दूसरी जाति की हैं।

इस विवाह से नाराज़ सतगढ़ तंवर समाज के कुछ लोगों ने बैठक बुलाकर डीएसपी और उनके परिजनों इस मामले की शिकायत बेलगहना पुलिस चौकी में दर्ज कराई। शिकायत के बाद जब कोटा एसडीओपी ने जांच शुरू की और समाज पदाधिकारियों को बयान देने के लिए बुलाया, तब समाज की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया गया कि पुलिस उन्हें परेशान कर रही है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि क्या आप संविधान से ऊपर हैं? विवाह करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। किसी व्यक्ति को उसके निजी फैसले के आधार पर सामाजिक रूप से अपमानित या बहिष्कृत नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अंतरजातीय विवाह केवल संविधान सम्मत ही नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और समरसता की दिशा में एक जरूरी कदम है। कोर्ट ने समाज के पदाधिकारियों की याचिका को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि निजी जीवन में दखल देना पूरी तरह गलत है।

इस प्रकरण में पुलिस ने पहले ही समाज के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।