🔴3 गोली लगने के बावजूद लीड करते रहे टीम को
सीजी न्यूज ऑनलाइन 20 नवंबर। डोंगरगढ़ और बालाघाट के सीमावर्ती घने जंगलों में हुए नक्सली मुठभेड़ में मध्यप्रदेश हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए। 19 नवंबर को कुरझेर-बोरतालाब के जंगल में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की संयुक्त टीम तलाशी अभियान पर निकली थी। आशीष शर्मा तीनों टीम को लीड कर रहे थे।
इस दौरान उनका सामना नक्सलियों से हुआ। नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, इस दौरान आशीष शर्मा को 3 गोली लगी थी। इस हालत में भी वे आगे बढ़कर अपनी टीम को लीड करते रहे और जवाबी फायरिंग की।
हालांकि इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। उनकी नेतृत्व में जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली अपना सामान, राशन पानी सब छोड़कर भाग गए।
आशीष की जनवरी 26 में होनी थी शादी
आशीष शर्मा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के रहने वाले थे। उनका चयन 2016 में सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ था। इससे पहले वे इंटेलिजेंस में आरक्षक के पद पर सेवाएं दे रहे थे।
कुछ समय पहले हॉक फोर्स ने बालघाट जंगल में चार नक्सलियों को ढेर किया था। इसके बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर निरीक्षक बनाया गया।
दो साल में केंद्र सरकार से उन्हें दो वीरता पदक मिल चुके थे। बताया जा रहा है आशीष शर्मा की शादी तय हो गई थी। दो महीने बाद जनवरी 2026 में शादी होनी थी।
शहीद इंस्पेक्टर की उपलब्धि
आशीष शर्मा हॉक फोर्स के उन सक्रिय अधिकारियों में से थे जिनकी कार्रवाइयों ने नक्सली नेटवर्क को कई बार तोड़ा था और वे नक्सलियों के लिए एक जाना-पहचाना नाम थे।
उनकी यही उपलब्धियां थीं कि सुरक्षा बलों में उनका नाम सम्मान से लिया जाता था और नक्सली संगठन उन्हें खुली चुनौती मानते थे। आशीष कई बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर कर चुके है।
हर्राटोला की मुठभेड़ में 14 लाख इनामी नक्सली रूपेश उर्फ हुंगा डोडी को मार गिराया था।
कदला की मुठभेड़ में 28 लाख की संयुक्त इनामी एसीएम सुनीता और सरिता को ढेर किया था।
रौंदा के जंगलों में 62 लाख कुल इनामी नक्सलियों-आशा, रजनीता और सरिता को खत्म किया था।
नक्सलियों के निशाने पर थे
जिस तरह निरीक्षक आशीष शर्मा नक्सलियों के खिलाफ कई बड़ी सफलताओं की वजह बने थे, यह मुमकिन है कि नक्सली इकाइयों ने उन्हें निशाने पर लेने की कोशिश की हो। हालांकि आधिकारिक तौर इस बात की चर्चा नहीं है।

