चार बार असफल होने के बाद भी नहीं खोया धैर्य, मां के समझाने पर कड़ी मेहनत से डॉक्टर बना बेटा, पढ़ें संदीप विशाल की सफलता की कहानी
भिलाई नगर 11 जून । गांव के घर में जानवरों की साफ-सफाई करने वाले को दिखाकर मां बोली देख बेटा अभी पढ़ाई कर ले नहीं तो जीवन भर यही काम करना पड़ेगा। फिर मत बोलना की मां ने समझाया नहीं। मां की इस बात को सुनकर बेटे ने अपने फेल्यिर को सक्सेस में बदलने का दृढ़ निश्चय किया और चौथे प्रयास में अंतत: डॉक्टर बनकर पूरे परिवार का मान बढ़ा दिया। ये कहानी है महासमुंद जिले के पिथौरा के रहने वाले डॉ. संदीप विशाल की। डॉ. संदीप कहते हैं कि मैं तीसरे ड्रॉप में घर पर थक हारकर बैठ गया था। तब मां ने उदाहरण देकर पढ़ाई का महत्व ऐसे समझाया कि फिर कभी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी बातों से मुझे हौसला मिला। मैंने गिवअप की जगह फिर एक बार कोशिश करने का मन बनाया और साल 2012 में सीजी पीएमटी क्वालिफाई कर लिया। लगातार मिल रही असफलता अंदर तक तोड़ देती है लेकिन यही वो वक्त होता है जब आपको खुद को संभालते हुए धैर्य बनाकर रखा है। सबसे बड़ी बात, लोग क्या कह रहे इस बात को नजरअंदाज करके खुद पर भरोसा करना है।
अंग्रेजी में था बहुत कमजोर, तैयारी के दौरान होती थी दिक्कत
12 वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से करने वाले डॉ. संदीप ने बताया कि शुरुआत में अंग्रेजी में खासी परेशानी होती थी। एक दिन कोचिंग में सर वाष्पोत्सर्जन के बारे में पढ़ा रहे थे। वे बार-बार ट्रांसपरेशन का जिक्र कर रहे थे। जो मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था। जब रूम जाकर मैंने ट्रांसपरेशन के बारे में पढ़ा तो पता चला कि ये वाष्पोत्सर्जन क्रिया का ही अंग्रेजी नाम है। अंग्रेजी को लेकर पहले साल तक इसी तरह की समस्याओं से मैं जूझता रहा। बाद में अंग्रेजी और हिंदी की किताबों को साथ में पढऩा शुरू किया तब जाकर अंग्रेजी के शब्द पल्ले पड़े। बेसिक कमजोर होने के कारण पहले दो साल तक तीनों मुख्य विषयों को डीपली समझने में निकल गया। तब तीसरे साल पूरी तैयारी के साथ उतरा तो असफलता हाथ लगी। ऑल इंडिया पीएमटी का प्री क्लीयर करके हर बार मैं मेंस में अटक जाता था। जो धीरे-धीरे डिप्रेशन का कारण बनते चला गया।
जैन सर की काउंसलिंग से ड्रॉप इयर का डिपे्रशन हुआ दूर
सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से मेडिकल एंट्रेस की तैयारी करने वाले डॉ. संदीप ने बताया कि बढ़ते हुए ड्रॉप के साथ मैं डिप्रेशन में जा रहा था। मेरे साथ वाले लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच गए थे जबकि मैं अभी भी तैयारी में जुटा था। ऐसे में सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने मेरी काउंसलिंग करते हुए समझाया कि अभी से दूसरों से अपनी तुलना मत करो। ड्रॉप इयर बढऩे के साथ-साथ तुम्हारी मेहनत दोगुनी होनी चाहिए न कि डिप्रेशन। उनकी बातों से मोटिवेशन मिला। इस बीच मैंने लगातार सचदेवा का टेस्ट सीरिज दिया जिसका लाभ मेन एग्जाम में मिला। सचदेवा में टीचर्स काफी एक्सपीरियंस हैं। सबसे बड़ी बात गांव से आने वाले स्टूडेंट्स का बेसिक स्ट्रांग करने के लिए यहां टीचर्स बहुत मेहनत करते हैं। गेस्ट लेक्चर से मोटिवेशन मिलता है। यहां तीनों विषयों की पढ़ाई एक ही छत के नीचे होती है जिससे स्टूडेंट्स का काफी वक्त बच जाता है।
लैंग्वेज को मत बनने दो फोबिया
नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप लैंग्वेज को फोबिया मत बनने दो इसे भी बाकी विषयों की तरह पढ़कर स्ट्रांग किया जा सकता है। ड्रॉप इयर बढऩे के साथ निराशा हावी होती जाती है। इस समय में किसी विशेषज्ञ या फिर पैरेंट्स से बात करें। काउंसलिंग, डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद करता है।

