12 वीं तक नहीं पता था कैसे बनते हैं डॉक्टर, ड्रॉप लेकर की मेडिकल एंट्रेस की तैयारी, एवरेज स्टूडेंट था, कड़ी मेहनत से आया खुद पर कॉन्फिडेंस, पढ़ें डॉ उत्तम के सफलता की कहानी

12 वीं तक नहीं पता था कैसे बनते हैं डॉक्टर, ड्रॉप लेकर की मेडिकल एंट्रेस की तैयारी, एवरेज स्टूडेंट था, कड़ी मेहनत से आया खुद पर कॉन्फिडेंस, पढ़ें डॉ उत्तम के सफलता की कहानी


12 वीं तक नहीं पता था कैसे बनते हैं डॉक्टर, ड्रॉप लेकर की मेडिकल एंट्रेस की तैयारी, एवरेज स्टूडेंट था, कड़ी मेहनत से आया खुद पर कॉन्फिडेंस, पढ़ें डॉ उत्तम के सफलता की कहानी

भिलाई नगर 15 मई . बचपन से एवरेज स्टूडेंट रहे बैकुण्ठपुर निवासी डॉ. उत्तम कुमार सिंह को 12 वीं तक पता नहीं था कि डॉक्टर कैसे बनते हैं। किसी माध्यम से जब मेडिकल एंट्रेस की जानकारी मिली तो ड्रॉप ही एकमात्र विकल्प बचा था। इसलिए उन्होंने ड्रॉप लेकर कोचिंग में एडमिशन ले लिया। खुद के अंदर कॉन्फिडेंस की कमी के कारण पहले ड्रॉप में पूरी तैयारी के बावजूद फाइनल एग्जाम में अच्छा परफार्मेंस नहीं दे पाए। एग्जाम प्रेशर के चलते सलेक्शन से चूक गए। पहली बार असफलता का मुंह देखने के बाद वे काफी निराश भी हो गए थे, लेकिन घर वालों के सहयोग और मोटिवेशन से सेकंड ड्रॉप लेकर फिर तैयारी शुरू की और साल 2011 में मेडिकल एंट्रेस क्लीयर कर लिया। छोटे से जगह से निकलकर पहले एमबीबीएस फिर एमडी मेडिसीन की पढ़ाई कर लोगों की सेवा करने वाले डॉ. उत्तम कहते हैं कि अपने ऊपर भरोसा होना बहुत जरूरी है। मैं पहले एग्जाम से डरता था। बार-बार मन में ख्याल आता था कि पता नहीं मेरा सलेक्शन हो पाएगा कि नहीं। इसी डर के कारण एग्जाम से कुछ महीने पहले पहले पढ़ाई डाउन हो जाती थी। एग्जाम प्रेशर में कुछ पढ़ ही नहीं पाता था। सही समय में काउंसलिंग से अपने इस डर पर काबू पाया तब जाकर सफलता मिली। 

कैमेस्ट्री था वीक, करनी पड़ी डबल मेहनत

डॉ. उत्तम ने बताया कि पहले मुझे मैथ्स में इंटरेस्ट था लेकिन क्लास बढऩे के साथ मैथ्स भी वीक हो गया। कोई विकल्प नहीं बचा था इसलिए बायो लेकर पढ़ाई की। पहले कोई भी एम डिसाइड नहीं था। इसलिए डिसिजन लेने में काफी लेट हो गया। जब मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी शुरु की तो समझ आया कि सब कुछ जीरो से पढऩा पड़ेगा। बेसिक कमजोर था इसलिए बेसिक को स्ट्रांग करने के लिए खासी मेहनत करनी पड़ी इसके अलावा कैमेस्ट्री मुझे मिस्ट्री लगती थी। कैमेस्ट्री को स्ट्रांग करने के लिए मैंने दोगुनी मेहनत की जिसका लाभ भी फाइनल एग्जाम में मिला। एवरेज स्टूडेंट के लिए दिन में आठ से दस घंटे बैठकर पढऩा बहुत मुश्किल था। पहले आदत नहीं थी लेकिन क्लासरूम के बाकी बच्चों को देखकर खुद को मोटिवेट करता गया। 

जैन सर की पर्सनल काउंसलिंग आई काम

मेडिकल एंट्रेस की तैयारी सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाले डॉ. उत्तम ने बताया कि जब मैं पहली बार मैं घर से अकेले कोचिंग करने आया था। शहर के भीड़भाड़ की आदत नहीं थी इसलिए यहां एडजेस्ट होने में काफी टाइम लगा। सचदेवा के टीचर्स ने काफी मोटिवेट किया। वे डाउन टू अर्थ होकर हर स्टूडेंट पर बराबर ध्यान देते हैं। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की एग्जाम से पहले पर्सनल काउंसलिग मेरे लिए संजीवनी साबित हुई। मोटिवेशन क्लास और पर्सनल काउंसलिंग से ही मैं एग्जाम प्रेशर को हैंडल कर पाया। सचदेवा की यही बात इस संस्थान को बाकी संस्थानों से बेस्ट बनाती है। 

मन से करने की बजाय टीचर की बातों को करें फॉलो

नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप अपने मन से पढऩे की बजाय टीचर की बातों को ब्लाइंडली फॉलो करना चाहिए। ज्यादा दिमाग लगाने के चक्कर में हम बेसिक सिलेबस भी कवर नहीं कर पाते। इसलिए टीचर पर भरोसा करके उनके बताए चीजों को फॉलो करना चाहिए। तैयारी के पहले दिन से एग्जाम प्रेशर को हैंडल करना सीखना चाहिए।