हाइलाइट्स
सोमवार को दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा में पास हो गया.
बिल के पक्ष में 131 जबकि इसके खिलाफ 102 वोट पड़े.
अब इस बिल पर राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है. अमित शाह ने सदन में हंगामे के बीच कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का हक नहीं है.
नई दिल्ली 8 अगस्त । राज्यसभा में सोमवार को पूरा दिन दिल्ली सेवा बिल (Delhi Service Bill) पर घमासान मचा रहा. गुरुवार को लोकसभा से पारित होने के बाद इस बिल को सोमवार को राज्यसभा में पेश किया गया. जिसे राज्यसभा में हुई वोटिंग के बाद मंजूरी दे दी गई. इस बिल के पक्ष में 131 जबकि इसके खिलाफ 102 वोट पड़े. बता दें कि यह विधेयक दिल्ली में ग्रुप-ए के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए एक प्राधिकार के गठन के लिहाज से लागू अध्यादेश का स्थान लेगा.
अब इस बिल पर राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है. इसके बाद यह कानून बन जाएगा. कल का पूरा दिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संसद से लेकर बाहर तक घमासान मचा रहा. बिल का पास होना दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन के लिए भी झटका है. आइए इस खबर में 10 प्वाइंट में जानते हैं कल क्या क्या हुआ.
राज्यसभा में वोटिंग कराने के लिए पहले मशीन से वोटिंग के प्रावधान को समझाया गया. लेकिन कुछ समय बाद उपसभापति ने घोषणा की कि मशीन में कुछ खराबी आ गई है. इसके बाद वोटिंग पर्ची के जरिए कराई गई.
बिल को लेकर कुछ विपक्षी सांसदों ने संशोधन भी बताए थे. लेकिन वोटिंग के जरिए बिल पास हो गया और संसद में दिल्ली सेवा बिल पर चर्चा खत्म होने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर जवाब दिया. साथ ही उन्होंने दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर हुए विवाद पर अरविंद केजरीवाल सरकार को घेरा.
इस दौरान गृह मंत्री ने दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि ‘इस बिल का उद्देश्य दिल्ली में सुचारू रूप से भ्रष्टाचार मुक्त शासन होना है. बिल के एक भी प्रावधान से, पहले जो व्यवस्था थी, उस व्यवस्था में एक इंच मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है.’
राज्यसभा में दिल्ली सेवा बिल पर बहस का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि यह बिल किसी पीएम को बचाने के लिए नहीं है. अमित शाह ने सदन में हंगामे के बीच कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का हक नहीं है. उन्होंने कहा कि AAP की गोद में बैठी कांग्रेस यह बिल पहले लेकर आई थी.
उन्होंने आगे कहा कई बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो दिल्ली में भाजपा की सरकार थी. कई बार केंद्र में भाजपा की सरकार थी तो दिल्ली में कांग्रेस की, उस समय ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर कभी झगड़ा नहीं हुआ. उस समय इसी व्यवस्था से निर्णय होते थे और किसी मुख्यमंत्री को दिक्कत नहीं हुई. कई सदस्यों द्वारा बताया गया कि केंद्र को शक्ति हाथ में लेनी है. हमें शक्ति लेने की जरूरत नहीं क्योंकि 130 करोड़ की जनता ने हमें शक्ति दी हुई है.
वहीं बिल के पास होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केंद्र को यह शक्ति जनता की सेवा करने के लिए दी गई है. अमित शाह दिल्ली में घर-घर जाकर पर्चे बांट रहे थे, दिल्ली के लोगों उन्हें नकार दिया तो दिल्ली के लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया.
AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि बिल एक ‘राजनीतिक धोखाधड़ी, संवैधानिक पाप है और एक प्रशासनिक गतिरोध पैदा करेगा.’ चड्ढा ने कहा कि भाजपा लगभग 40 वर्षों से दिल्ली को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है और अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी इसका वादा किया है. आप नेता ने कहा कि बीजेपी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं की 40 साल की मेहनत को बर्बाद कर दिया है.
बता दें कि सभी प्रमुख विपक्षी दलों–तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, कांग्रेस, भारत राष्ट्रीय समिति (BRS), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और अन्य ने अध्यादेश के खिलाफ लड़ाई में आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन दिया था.
मई में, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023 जारी किया था जिससे उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का कोई प्रभाव नहीं रहेगा जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र प्रशासन में ‘सेवाओं’ का नियंत्रण दिल्ली सरकार को दिया गया था. यह विधेयक दिल्ली सरकार में वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों और पदस्थापना के संबंध में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा.
राष्ट्रपति से मुहर लगने के बाद ये बिल मई में आए अध्यादेश की जगह लेगा. हालांकि, बिल में धारा 3A को हटा दिया गया है. धारा 3A अध्यादेश में थी. यह धारा कहती थी कि सेवा पर दिल्ली विधानसभा का कोई नियंत्रण नहीं है. ये धारा उपराज्यपाल को ज्यादा अधिकार देती थी.

