CJI ने डिजिटल रूप से जारी किया ई-स्मारिका “Nurturing the Future of the Judiciary”

CJI ने डिजिटल रूप से जारी किया ई-स्मारिका “Nurturing the Future of the Judiciary”


🔴छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की विरासत को किया रेखांकित


रायपुर, 23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा कल रायपुर स्थित होटल बेबीलोन कैपिटल में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant के सम्मान में एक गरिमामय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश P. S. Narasimha एवं Prashant Kumar Mishra विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं High Court of Chhattisgarh के मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के सभी माननीय न्यायाधीश भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
समारोह का शुभारंभ अतिथियों के औपचारिक स्वागत एवं अभिनंदन से हुआ। इसके पश्चात माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की वर्ष 2026 की ई-स्मारिका “Nurturing the Future of the Judiciary” का डिजिटल विमोचन किया गया। यह ई-स्मारिका न्यायिक अकादमी की स्थापना से लेकर आधुनिक विधिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उसके विकास की यात्रा को दर्शाती है।
अपने स्वागत उद्बोधन में मुख्य न्यायाधीश रमेेश सिन्हा ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांत का संवैधानिक मूल्यों एवं न्यायिक निष्पक्षता के प्रति समर्पण समूचे न्यायिक समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि ई-स्मारिका केवल एक डिजिटल दस्तावेज नहीं, बल्कि न्यायिक शिक्षा, अधोसंरचना विकास और डिजिटल युग के अनुरूप हुए परिवर्तन का सजीव दस्तावेज है।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांत ने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय गणराज्य की युवा संवैधानिक संस्थाओं में से एक है, किंतु इसने अल्प समय में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “छत्तीसगढ़” नाम पारंपरिक रूप से “छत्तीस किलों की भूमि” के रूप में जाना जाता है। ये किले केवल रक्षा संरचनाएं नहीं थे, बल्कि प्रशासन और सामुदायिक जीवन के केंद्र थे। इसी प्रकार संवैधानिक न्यायालय आधुनिक लोकतंत्र के किले हैं, जो भू-भाग नहीं बल्कि नागरिकों के अधिकारों और संवैधानिक सीमाओं की रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक न्यायाधीश को अपने दायित्वों में सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। साथ ही न्यायालय को समाज से कटकर “आइवरी टॉवर” नहीं बनना चाहिए, बल्कि बस्तर, सरगुजा सहित राज्य के हर जिले तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि न्यायिक अकादमी केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि न्यायपालिका की भावी शक्ति का निर्माण स्थल है। युवा उच्च न्यायालय के लिए अकादमी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहीं से संवैधानिक संस्कृति और संस्थागत परंपराएं विकसित होती हैं।
कार्यक्रम का समापन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश Sanjay K. Agrawal द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समारोह में उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश, तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पी. सैम कोशी, विधि विभाग के प्रधान सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, न्यायिक अकादमी के अधिकारी एवं रायपुर जिला के न्यायिक अधिकारी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।