ग्रेच्युटी सीमित करने के खिलाफ सीटू ने प्रबंधन को दिया विरोध पत्र, कर्मियों के बीच उठ रहे सवाल

ग्रेच्युटी सीमित करने के खिलाफ सीटू ने प्रबंधन को दिया विरोध पत्र, कर्मियों के बीच उठ रहे सवाल


ग्रेच्युटी सीमित करने के खिलाफ सीटू ने प्रबंधन को दिया विरोध पत्र, कर्मियों के बीच उठ रहे सवाल

भिलाई नगर 30 नवंबर । ‘सेल’ कॉर्पोरेट कार्यालय द्वारा जारी ग्रेच्युटी सीलिंग संबंधित आदेश को लेकर कर्मियों के बीच लगातार सवाल उठ रहे हैं । आज कर्मियों के साथ सीधा संवाद करते हुए सीटू नेताओं ने उन्हें जानकारी दी कि सेल प्रबंधन द्वारा इस्पात कर्मियों के ग्रेच्युटी को सीलिंग करने के खिलाफ हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन (सीटू) द्वारा प्रबंधन को विरोध पत्र देकर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के ग्रेच्युटी में किसी भी तरह की कटौती नहीं करने का आग्रह किया गया है ।

ज्ञात हो कि सेल कारपोरेट कार्यालय से 26/11/2021 को जारी आदेश द्वारा सेल के कर्मियों की ग्रेच्युटी को भी सीलिंग कर दिया गया है। आदेश के अनुसार 31 अक्टूबर 2021 को या उससे पूर्व  सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को वेतन पुनर्निर्धारण पूर्व मूल वेतन तथा डीए के आधार पर सेल ग्रेच्युटी नियम की गणना अनुसार ग्रेच्युटी प्राप्त होगी, अर्थात 30 वर्ष की सेवा पर उन्हें (15/26)×(मूल वेतन+डीए)×(सेवा वर्ष) तथा 30 वर्ष के पश्चात प्रत्येक 1 वर्ष के सेवाकाल पर 1 महीने के मूल वेतन व डीए के बराबर ग्रेच्युटी प्राप्त होगी । 

भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले जिन कर्मियों का ग्रेच्युटी 20 लाख के ऊपर बनेगा उनकी ग्रेच्युटी को 31 अक्टूबर 2021 को वेतन पुनर्निर्धारण पूर्व बेसिक और डीए के आधार पर की गई गणना अनुसार या 20 लाख या जो अधिक हो, पर सीमित कर दिया जाएगा ।

श्रम विधानों का पालन करना स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी – सीटू

 सीटू महासचिव एसपी डे ने कहा कि कॉरपोरेट जो भी आदेश जारी करें, उस आदेश को लागू करते समय ‘वह विधि सम्मत है’ यह सुनिश्चित करना स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी है। कॉरपोरेट प्रबंधन की जिम्मेदारी कंपनी एक्ट का पालन करना है। जबकि स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी उन सभी कानूनों का अनुपालन करना है । जिसका  फैक्ट्री एवं फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों या कर्मचारियों से संबंध है जैसे फैक्ट्री एक्ट, मजदूरी भुगतान अधिनियम, भविष्य निधि भुगतान अधिनियम , ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम आदि । यदि सेल कार्पोरेट कार्यालय के आदेशानुसार प्रबंधन सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के ग्रेच्युटी में किसी भी तरह की कटौती करती है तो यह उपादान भुगतान अधिनियम 1972 का उल्लंघन होगा। अतः प्रबंधन को इस तरह के किसी भी कानूनी उल्लंघन से बचना चाहिए।

ग्रेच्युटी एक्ट बनने से पहले से इस्पात कर्मियों को एनजेसीएस में मिला ग्रेच्युटी का अधिकार

सीटू नेता ने कहा कि ग्रेच्युटी एक्ट 1972 में बना किंतु ग्रेच्युटी एक्ट बनने से काफी पहले इस्पात कर्मियों को 28 अक्टूबर 1970 को हुआ पहला एनजेसीएस समझौता के माध्यम से असीमित ग्रेच्युटी  का अधिकार प्राप्त हुआ है।

सिर्फ इस्पात कर्मियों को अब तक मिलता रहा असीमित ग्रेच्युटी

 एनजेसीएस के प्रथम समझौता में प्राप्त असीमित ग्रेजुएटी को अब तक एनजेसीएस में हुए सभी समझौतों में बरकरार रखा गया। पिछले वेतन समझौता में भी प्रबंधन ने कहा था कि मंत्रालय से काफी दबाव है कि इस्पात कर्मियों की ग्रेच्युटी को भी अन्य कर्मियों की तरह सीलिंग किया जाए, किंतु एनजेसीएस की सभी यूनियनों के विरोध के कारण प्रबंधन द्वारा इसे सीमित नहीं किया जा सका।