🔴ड्रैगन के दबदबे को चुनौती देगा भारत, बैकफुट पर आएंगे ट्रंप
सीजी न्यूज ऑनलाइन, 03 नवंबर। India Rare Earth Elements: रेअर अर्थ वहीं दुर्लभ धातु है, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन के सामने बैकफुट पर जाने को मजबूर कर दिया. धरती को वो दुर्लभ खजाना जिसके दाम पर चीन अपनी धौंस अमेरिका समेत दुनियाभर के देशों को दिखाता है
Rare Earth Magnet: रेअर अर्थ वहीं दुर्लभ धातु है, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन के सामने बैकफुट पर जाने को मजबूर कर दिया. धरती को वो दुर्लभ खजाना जिसके दाम पर चीन अपनी धौंस अमेरिका समेत दुनियाभर के देशों को दिखाता है. यहीं वो धातु है, जिसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर चीन ने दुनियाभर को हिला दिया. तेल और सोने की तरह ताकतवर ये दुर्लभ धातु अमेरिका समेत दुनियाभर की नींद उड़ा रहा है. चीन की मनमानी सिर्फ अमेरिका को ही नहीं बल्कि भारत को भी परेशान कर रही है. रेअर अर्थ के मामले में चीन का दुनियाभर में दबदबा है, लेकिन अब भारत ने कमर कस ली है. भारत ने रेअर अर्थ पर मेगा प्लान बना लिया है.
7000 करोड़ का मेगा प्लान
रेअर अर्थ पर खुद को और मजबूत करने के लिए भारत ने बड़ा प्लान तैयार किया है . केंद्र सरकार ने प्रोत्साहन कार्यक्रम (incentive program) को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 7000 करोड़ रुपए से अधिक करने का फैसला किया. रेअर अर्थ पर चीन का दबदबा कम करने के लिए भारत अपने प्रोत्साहन कार्यक्रम को तीन गुना करने की तैयारी कर रहा है. इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र की जान रेअर अर्थ मिनिरल्स पर चीन को अपनी निर्भरता को कम करने के लिए भारत ने 7000 करोड़ रुपये से अधिक का इंसेंटिव प्रोग्राम चलाने का फैसला किया है. इस स्कीम के तहत लोकल प्रोडक्शन के लिए इंसेंटिव दिए जाएंगे.आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ मैग्नेट-लेस मोटर पर रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा.
भारत के कदम से चीन और अमेरिका दोनों की मनमानी का इलाज
चीन ने रेअर अर्थ के निर्यात पर प्रतिबंध क्या लगाया अमेरिका तिलमिला उठा. उसने भारत का रुख करते हुए रेअर अर्थ रिफाइनिंग को बढ़ाने के लिए साथ देने की बात कही. अमेरिका भी रेअर अर्थ के मामले में भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. चीन दुनिया के लगभग 90% दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन को प्रोसेस करता है. अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर बढ़ने पर चीन ने इसके एक्सपोर्ट पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थीं. भारत के लिए कुछ छूट रखी गई, लेकिन सरकार खुद को रेअर अर्थ में आत्मनिर्भर करना चाहती है.
मिल रहा दूसरे देशों का साथ
भारत के इस प्लान को दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का साथ मिल रहा है, क्योंकि ये चीन की दादागिरी से परेशान है.वो भारत को चीन के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. रेअर अर्थ में आत्मनिर्भर बनने से अमेरिका का रौब भी कम होगा. भारत को सालाना करीब 2000 टन नियोडिमियम ऑक्साइड की जरूरत है, लेकिन IREL (इंडिया) सिर्फ 400-500 टन की सप्लाई कर पाती है, बाकी आयात करना पड़ता है. ऐसे में भारत खुद को रेअर अर्थ में आत्मनिर्भर बनाकर इस परेशानी से बच सकता है. भारत में रेअर अर्थ का भंडार है, लेकिन उसकी रिफाइनिंग की प्रक्रिया विकसित नहीं है, जिसपर फोकस बढ़ाया जा रहा है.

