गांव के मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचेंगी छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं, मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की तैयारी तेज

गांव के मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचेंगी छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं, मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की तैयारी तेज


🛑बिलासपुर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर की क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने की योजना, टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से खोजी जाएंगी नई प्रतिभाएं

रायपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को गांवों के मैदान से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार व्यवस्थित खेल प्रशिक्षण तंत्र विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में छिपी प्रतिभाओं की पहचान से लेकर आधुनिक प्रशिक्षण, पोषण, स्पोर्ट्स साइंस और उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खेल प्रतिभाओं की कम उम्र में पहचान कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना और वित्तीय प्रबंधन पर भी बैठक में विस्तृत चर्चा हुई।

गांवों और जनजातीय अंचलों की प्रतिभाओं पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत ऐसी प्रतिभाओं को सही समय पर पहचानने और उन्हें उचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं की खोज केवल बड़े शहरों और खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों तक पहुंचना होगा।

मुख्यमंत्री ने ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की क्षमता है। कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों या अवसरों की कमी के कारण पीछे नहीं रहना चाहिए।

स्कूलों से ही तैयार होंगे खिलाड़ी

मुख्यमंत्री ने स्कूल स्तर से बच्चों को नियमित खेल गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से स्कूलों में खेल संस्कृति को मजबूत करने के निर्देश दिए। उनके अनुसार, खेल बच्चों में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना भी विकसित करते हैं।

स्कूल स्तर पर ही प्रतिभाओं की पहचान होने से बच्चों को समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। इससे खेलों को करियर के रूप में अपनाने के इच्छुक युवाओं के लिए भी बेहतर अवसर तैयार होंगे।

फीडर सेंटर से उत्कृष्टता केंद्र तक प्रशिक्षण व्यवस्था

मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित विभिन्न खेलों के विकास पर चर्चा की गई।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, फीडर सेंटरों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जाएगा। खिलाड़ियों की प्रगति और प्रदर्शन का नियमित आकलन करने पर भी जोर दिया गया, ताकि उन्हें उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।

स्पोर्ट्स साइंस, पोषण और प्रशिक्षित कोच पर जोर

मुख्यमंत्री ने खेलवार योग्य और प्रशिक्षित कोचों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी मिलना चाहिए।

मिशन के तहत पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, मनोवैज्ञानिक सहयोग, फिटनेस, चोटों से बचाव और पुनर्वास जैसी सुविधाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर विचार किया गया। इसके साथ ही मौजूदा स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों के बेहतर उपयोग, रखरखाव तथा आवश्यकतानुसार उन्नयन पर जोर दिया गया।

बिलासपुर सेंटर में 300 खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की योजना

बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की समीक्षा की गई। इसके तहत सेंटर में आवासीय खिलाड़ियों की क्षमता वर्तमान 165 से बढ़ाकर 300 करने और संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है। इससे अधिक खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से मिलेगा मंच

खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर देने के लिए टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा हुई।

इन प्रतियोगिताओं के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चिन्हित कर उन्हें उन्नत प्रशिक्षण और उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।

महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को विशेष अवसर

मुख्यमंत्री ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर, पैरा स्पोर्ट्स के विकास और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप खिलाड़ियों को तैयार करने संबंधी योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

पांच साल की कार्ययोजना पर मंथन

मुख्यमंत्री साय ने मिशन के लिए स्पष्ट, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया।

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल खेल अधोसंरचना का विस्तार करना नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्चस्तरीय प्रदर्शन तक खिलाड़ियों को आवश्यक सहयोग मिल सके। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के जरिए प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।