गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के गीतों का छत्तीसगढ़ी वर्जन भिलाई के कालीबाड़ी मंच से हुआ रिलीज

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के गीतों का छत्तीसगढ़ी वर्जन भिलाई के कालीबाड़ी मंच से हुआ रिलीज


भिलाई नगर 15 जनवरी । विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरु गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर जिन्हें बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा भी जाना जाता है। गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा लिखे गीतों का प्रथम बार छतीसगढ़ी में अनुवाद कर उनके गीतों को जन जन तक पहुंचाने का निर्णय बरूण चक्रवर्ती, मुख्य निर्देशक जे. एम. सी. लाइव बैंड, अश्वत्थ की एक इकाई द्वारा किया गया । जिसके तहत कवि गुरु गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर के गीतों के अनुवाद की जिम्मेदारी दुर्ग के ख्याति प्राप्त कवि रंगकर्मी एवं शिल्पकार लक्ष्मी नारायण कुंभकार को प्रदान की गई। कवि गुरु गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर के मूल गीतों से छतीसगढ़ी में अनुवाद के कुछ गीतों का लोकार्पण बरूण चक्रवर्ती के निर्देशन में छत्तीसगढ़ की ख्याति प्राप्त गायिका श्रीमती गौतमी चक्रवर्ती के कंठ स्वर में आज मकर संक्रांति के अवसर पर भिलाई नगर कालीबाड़ी 4 साल की होगी गाना सेक्टर-6 के मंच पर किया गया। लोकार्पण में संगीतकार साई चक्रवर्ती, पार्थ चक्रवर्ती, बी डी आमोश रहे, सम्पूर्ण संयोजन सारथी चक्रवर्ती ने किया । अति शीघ्र ही यु ट्यूब में भी गीतों को अपलोड कर दिया जायेगा |

जे. एम. सी. लाइव बैंड, अश्वत्थ की एक इकाई द्वारा निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कवि गुरु गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर के गीतों का छतीसगढ़ी में अनुवाद एवं गायन द्वारा प्रस्तुति का क्रम जारी रहेगा एवं भविष्य में रबीन्द्र नृत्यम मूल नृत्य शैली के साथ छतीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक नृत्य शैलियों के सामंजस्य से मंच पर प्रस्तुति की भी परिकल्पना की रूप रेखा निश्चित कर ली गई है।