CGMSC घोटाला : आईएएस अफसर से पूछताछ, ईओडब्लू-एसीबी की जांच तेज

CGMSC घोटाला : आईएएस अफसर से पूछताछ, ईओडब्लू-एसीबी की जांच तेज


🛑 कई और अफसर आ सकते हैं लपेटे में

सीजी न्यूज ऑनलाइन 04 जनवरी। सीजीएमएससी में दवा खरीद घोटाले में आईएएस अफसर लपेटे में आ गए हैं। ईओडब्ल्यू-एसीबी ने पूछताछ के लिए बुलाया है। बताया गया कि इन अफसरों के अलावा स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की घोटाले में संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं।

ईओडब्ल्यू-एसीबी के सूत्रों ने बताया कि अफसर भीम सिंह, चंद्रकांत वर्मा, मीनाक्षी गौतम, बसंत कौशिक, डॉ अनिल परसाई, क्षीरौंद्र रावटिया एवं कमलकांत पाटनवार पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। सभी को नोटिस जारी किया जा रहा है।

जांच एजेंसी ने दवा खरीदी घोटाले में प्रदेश के बड़े सप्लायर शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ के बाद कई नई जानकारी छनकर सामने आई है। दवा खरीदी का यह घोटाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। यह घोटाला 400 करोड़ से अधिक का है।

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने पिछले दिनों चोपड़ा के प्रतिष्ठान मोक्षित कार्पोरेशन में दबिश दी थी, और रायपुर, दुर्ग समेत कई जिलों में छापेमारी की थी। छापे में कई अहम दस्तावेज मिले थे। सूत्र बताते हैं कि चोपड़ा काज सीजीएमएससी में दवा सप्लाई का काम में एक तरह के एकाधिकार रहा है। यह बात उभरकर सामने आई है कि भाटापारा, बलौदाबाजार, रायपुर समेत कई जगहों में स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सकों ने बकायदा सीजीएमएससी और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर बॉयो केमेस्ट्री रीएजेंट और इससे जुड़े उपकरण की आपूर्ति न करने का आग्रह किया था।

प्रभारी चिकित्सकों ने यहां तक लिखा था कि उनके यहां पर्याप्त मात्रा में रीएजेंट उपलब्ध है। रख रखाव की व्यवस्था नहीं है। ज्यादा समय तक रखने से खराब होने की आशंका है। बावजूद इसके सीजीएमएससी में खरीदी होती रही, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रीएजेंट और उपकरण खपाए जाते रहे।
खास बात यह है कि आईएएस अफसर भीम सिंह, चंद्रकांत वर्मा, स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सीजीएमएससी में पदस्थ रहे हैं। इसके अलावा कार्पोरेशन के कई अफसरों के अलावा स्वास्थ्य विभाग के अफसर की घोटाले में संलिप्तता सामने आई है। यही नहीं, शिकायतों के बावजूद मोक्षित कार्पोरेशन को कुछ महीने पहले 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।

पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने सीजीएमएससी में सैकड़ों करोड़ के घोटाले की जांच कराने के लिए सीएम से लेकर पीएम तक पत्र लिखा था। उन्होंने काफी दस्तावेज भी दिए थे। यही नहीं, स्वतंत्र पत्रकार देवेन्द्र गुप्ता ने भी सोशल मीडिया के जरिए सीजीएमएससी में घोटाले को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। बहरहाल, आने वाले दिनों में कुछ अफसरों पर गाज गिर सकती है।