CG News : 11 फर्जी फर्में बनाकर बैंक से निकाले 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन

CG News : 11 फर्जी फर्में बनाकर बैंक से निकाले 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन


🛑ऑफ बड़ौदा को ₹5.04 करोड़ की चपत, फर्जी दस्तावेजों व दूसरों की संपत्तियों को बनाया गया ऋण का आधार, EOW-ACB ने दो आरोपियों के खिलाफ पेश किया चालान

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 01 नवंबर 2026। बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा में 11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण हासिल कर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। करीब छह साल तक चली विवेचना के बाद एजेंसी ने तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ विशेष न्यायालय, बिलासपुर में चालान पेश कर दिया है। इस कथित फर्जीवाड़े से बैंक को कुल ₹5,04,15,000 की आर्थिक क्षति हुई है।

EOW-ACB रायपुर ने अपराध क्रमांक 04/2020 की विवेचना पूरी करने के बाद 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत किया। बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर से मिली शिकायत की जांच के बाद 28 जनवरी 2020 को यह मामला दर्ज किया गया था।

दूसरों के दस्तावेजों से खड़ी कीं फर्जी फर्में

जांच में सामने आया कि विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय के माध्यम से लोगों को छोटे ऋण दिलाने और बैंकों से लोन उपलब्ध कराने का काम करता था। इस दौरान वह ऋण लेने आने वाले लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी दस्तावेज और संपत्ति के मूल कागजात हासिल कर लेता था। साथ ही बैंक के प्रपत्रों और कोरे चेकों पर हस्ताक्षर भी करा लेता था।

आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का दुरुपयोग कर संबंधित लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्में बनाई गईं। कुछ फर्मों में अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर दर्शाया गया। तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र भी कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे।

बैंक प्रबंधक ने नियमों को ताक पर रखकर मंजूर किए ऋण

विवेचना के अनुसार, 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन की सुविधाएं स्वीकृत कीं।

आरोप है कि ऋण लेने वाली फर्मों से असंबंधित व्यक्तियों की संपत्तियों को भी उनकी जानकारी के बिना बंधक के रूप में स्वीकार किया गया। ऋण स्वीकृति से पहले तैयार निरीक्षण रिपोर्ट में फर्मों के व्यवसाय और पते की गलत जानकारी दर्ज की गई। यहां तक कि एक फर्म का व्यावसायिक पता वास्तव में विश्वजीत भौमिक का तत्कालीन निवास स्थान था। ऋण प्रकरणों के अप्रेजल नोट भी तत्कालीन शाखा प्रबंधक द्वारा तैयार किए गए थे।

बैंक के निरीक्षण में नहीं मिलीं फर्मों की व्यावसायिक इकाइयां

मामले की जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। बैंक द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान मौके पर किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई नहीं मिली। सात फर्मों के जीएसटी रिटर्न उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से दाखिल किए गए थे। इसके बावजूद इन फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये की ऋण सुविधाएं स्वीकृत कर दी गईं। सभी 11 ऋण खाते वर्ष 2019 में ही एनपीए घोषित हो गए थे।

NSIC के माध्यम से अपनी फर्म तक पहुंचाई ऋण की रकम

EOW-ACB की विवेचना के मुताबिक, ऋण के रूप में प्राप्त रकम का इस्तेमाल संबंधित फर्मों के व्यवसाय में नहीं किया गया। राशि अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर निकाली गई और जांच में इसका अंतिम लाभार्थी विश्वजीत भौमिक पाया गया।

आरोप है कि बैंक से प्राप्त ऋण की रकम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से भौमिक की अपनी फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुंचाई गई। इसके लिए कूटरचित बिलों के आधार पर NSIC रायपुर से भी भुगतान प्राप्त किया गया।

दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में चालान

EOW-ACB ने विश्वजीत भौमिक (56 वर्ष), निवासी विवेकानंद नगर, मोपका, बिलासपुर और राहुल कुमार सिन्हा (45 वर्ष), तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा राजकिशोर नगर शाखा के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 12 एवं 13(2) के तहत चालान पेश किया है।

राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा की गढ़सीसा शाखा, जिला कच्छ (गुजरात) में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।

11 फर्जी फर्मों के जरिए ऋण हासिल करने और बैंक को ₹5.04 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के इस मामले में अब विशेष न्यायालय में सुनवाई होगी।