CG MSC घोटाला : 550 करोड़ के घपले में पूरक चालान पेश

CG MSC घोटाला : 550 करोड़ के घपले में पूरक चालान पेश


🔴4 और आरोपी अदालत में पेश

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 16 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) घोटाला मामले में आज बड़ा अपडेट सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बहुचर्चित ‘हमर लैब’ योजना से जुड़े भ्रष्टाचार प्रकरण में पूरक चालान माननीय न्यायालय में पेश किया है। इस चालान में चार आरोपियों को नामजद किया गया है।

इन आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान

पूरक चालान में जिन आरोपियों को शामिल किया गया है, उनमें—

▪️अभिषेक कौशल, डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकुला

▪️राकेश जैन, प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर

▪️प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा), लायजनर

▪️कुंजल शर्मा, मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई

इन सभी के खिलाफ धारा 409, 120बी भा.द.वि. और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

टेंडर में फर्जी दस्तावेज और कार्टेल बनाकर खेल

जांच में खुलासा हुआ है कि ‘हमर लैब’ योजना के तहत मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई। आरोपियों ने आपसी मिलीभगत कर कार्टेल बनाते हुए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया।
तीनों प्रमुख फर्मों—मोक्षित कॉर्पोरेशन, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज—ने पात्रता हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। इनमें उत्पादन क्षमता, सर्विस, मेंटेनेंस और इंस्टॉलेशन से जुड़े झूठे प्रमाण शामिल थे।

एक जैसे टेंडर पैटर्न से हुआ खुलासा

जांच एजेंसियों ने पाया कि तीनों फर्मों ने टेंडर में उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक जैसे पैटर्न में भरा। यहां तक कि जिन उत्पादों का जिक्र टेंडर में स्पष्ट नहीं था, उन्हें भी समान तरीके से दर्शाया गया। कीमतों का निर्धारण भी पूर्व नियोजित तरीके से किया गया।

एमआरपी से तीन गुना तक वसूली

मामले में यह भी सामने आया कि डायसिस कंपनी के रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए तय एमआरपी से कहीं अधिक दर CGMSC को भेजी गई। आरोप है कि कुंजल शर्मा और शशांक चोपड़ा ने मिलकर साजिश के तहत दरें बढ़ाईं, जिससे टेंडर में मोक्षित कॉर्पोरेशन की ऊंची दरें भी स्वीकार कर ली गईं।
इसके बाद मोक्षित कॉर्पोरेशन ने वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर सामग्री की आपूर्ति कर शासन को करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।

अब तक 10 आरोपी, जांच जारी

इस बहुचर्चित घोटाले में अब तक 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। जांच एजेंसी का कहना है कि ‘हमर लैब’ योजना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला प्रदेश में स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।