CG Health News : जब पद रिश्तों से मिलने लगें: CMHO ने पति को सौंपे जिले के अहम प्रभार, संचालन को लेकर उठे गंभीर सवाल

CG Health News : जब पद रिश्तों से मिलने लगें: CMHO ने पति को सौंपे जिले के अहम प्रभार, संचालन को लेकर उठे गंभीर सवाल



सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 03 फरवरी 2026।
कभी-कभी खबरें शोर नहीं करतीं, लेकिन व्यवस्था के भीतर छिपी परतों को बेनकाब जरूर कर देती हैं। जांजगीर-चांपा जिले के स्वास्थ्य विभाग में लिया गया एक प्रशासनिक निर्णय इन दिनों इसी वजह से चर्चा के केंद्र में है।
बीते 05 जनवरी 2026 को बीडीएम अस्पताल चांपा से स्थानांतरित होकर डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) का पदभार ग्रहण किया था। पदभार संभालने के महज 15 दिनों के भीतर उन्होंने अपने पति डॉ. मनीष श्रीवास्तव को जिले के दो अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रभार सौंप दिए।
जारी आदेश के अनुसार, डॉ. मनीष श्रीवास्तव को
▪️ प्रभारी जिला मलेरिया अधिकारी,
▪️ स्टोर/भंडार प्रभारी,
बनाते हुए जिला कार्यालय में अटैच किया गया है।


15 दिन, दो बड़े प्रभार और कई सवाल
मलेरिया नियंत्रण एवं जिला भंडार जैसे प्रभार सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य, बजट, दवा आपूर्ति और संसाधन प्रबंधन से जुड़े होते हैं। ऐसे में पति को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद विभागीय हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
डॉ. मनीष श्रीवास्तव के बीडीएम अस्पताल चांपा में पदस्थापना के दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा कलेक्टर को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप था कि वे नियमित रूप से ओपीडी में उपस्थित नहीं रहते, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता था और कई बार इलाज के लिए भटकना पड़ता था।
स्थानीय लोगों का कहना था कि लगातार गैर-मौजूदगी से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही थी।


शिकायत के बाद भी चुप्पी
शिकायतकर्ताओं ने डॉ. मनीष श्रीवास्तव को चांपा से हटाने की मांग की थी, लेकिन
▪️ न कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई,
▪️ न कोई निष्कर्ष सामने आया,
▪️ न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जानकारी मिली।


सूत्रों का दावा: संचालन किसके हाथ?
सूत्रों के अनुसार, जिले का स्वास्थ्य विभाग वर्तमान में उसी तर्ज पर संचालित होता दिख रहा है, जैसा कई ग्राम पंचायतों में देखने को मिलता है—जहां पद किसी के नाम होता है, लेकिन वास्तविक संचालन किसी और के प्रभाव में रहता है।
विभागीय चर्चाओं में यह बात आम है कि भले ही सीएमएचओ का पदभार डॉ. अनीता श्रीवास्तव के पास हो, लेकिन कई महत्वपूर्ण निर्णयों और प्रशासनिक गतिविधियों में डॉ. मनीष श्रीवास्तव की भूमिका प्रभावी मानी जा रही है।
महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी सवाल
एक ओर सरकार महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी महिला अधिकारी के कार्यकाल में यह धारणा बनने लगे कि विभागीय निर्णय किसी अन्य के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, तो यह स्थिति न केवल प्रशासनिक निष्पक्षता बल्कि महिला सशक्तिकरण की मूल भावना पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।


पूर्व शिकायत के बावजूद नोडल नियुक्ति
डॉ. मनीष श्रीवास्तव को कलेक्टर के अनुमोदन से मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम एवं जिला भंडार शाखा का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। लेकिन उनके विरुद्ध पूर्व में दर्ज शिकायतों ने इस नियुक्ति की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
▪️ क्या नियुक्ति से पहले सभी तथ्यों की जानकारी दी गई थी?
▪️ या कुछ जानकारियां जानबूझकर छिपाई गईं?
▪️ क्या यह निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि जब व्यवस्था चुप रहती है, तब सवाल और भी जरूरी हो जाते हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर किसी भी स्तर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच प्रक्रिया सामने नहीं आई है।