भिलाईनगर, 20 अगस्त 2026। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) परिसर में औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को केमिकल डिजास्टर डेमोंस्ट्रेशन एवं संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा भिलाई स्टील प्लांट के सुरक्षा एवं अग्निशमन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस अभ्यास में करीब 120 से 150 अधिकारियों, जवानों और तकनीकी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य रासायनिक गैस रिसाव अथवा अन्य औद्योगिक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पालन की क्षमता को परखना था। अभ्यास का नेतृत्व जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं जिला सेनानी तथा जिला अग्निशमन अधिकारी दिनेश कुमार रावटे के मार्गदर्शन में किया गया।

गैस रिसाव नियंत्रण का किया सजीव प्रदर्शन
अभ्यास के दौरान संयंत्र में जहरीली गैस अथवा रासायनिक पदार्थ के रिसाव की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। इसके बाद तत्काल अलार्म सक्रिय करने, लीकेज सीलिंग, वाल्व बंद करने और पैचिंग तकनीक के जरिए रिसाव को नियंत्रित करने का प्रदर्शन किया गया।
हजमत सूट और SCBA का किया उपयोग
रेस्क्यू टीमों ने रासायनिक रिसाव के दौरान बचावकर्मियों की सुरक्षा के लिए हजमत (Hazmat) सूट और सेल्फ-कंटेंड ब्रीदिंग एपरेटस (SCBA) के उपयोग का व्यावहारिक अभ्यास किया। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र से संयंत्र कर्मियों को हवा की दिशा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित स्थान और आपातकालीन असेंबली पॉइंट तक पहुंचाने का अभ्यास कराया गया।

डीकंटामिनेशन और वाटर कर्टेन तकनीक का प्रदर्शन
रासायनिक पदार्थ के संपर्क में आए कर्मचारियों एवं रेस्क्यू टीम के सदस्यों के शुद्धिकरण के लिए ऑन-साइट डीकंटामिनेशन शावर और वॉश कॉरिडोर का संचालन किया गया। जहरीली गैस के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए वाटर कर्टेन तकनीक तथा रासायनिक आग पर नियंत्रण के लिए फोम तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।

घायलों के उपचार और अस्पताल भेजने का अभ्यास
मॉक ड्रिल में गैस के प्रभाव से अचेत हुए कर्मियों को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट देने, CPR और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद एंबुलेंस से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया।
इस संयुक्त अभ्यास में BSP के सुरक्षा अधिकारी, CISF, संयंत्र के तकनीकी स्टाफ तथा SDRF और NDRF की टीमों ने हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान आपदा की स्थिति में क्विक रिस्पॉन्स, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और निर्धारित SOP के कड़ाई से पालन पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से वास्तविक रासायनिक अथवा औद्योगिक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

