सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 10 जनवरी। आज हम आपको ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं जिस घर के 2 भाई और 2 बहन आईएएस और आईपीएस ऑफिसर हैं। जरा सोचिए घर में जितने बच्चे हों और सब के सब सरकार में टॉप लेवल के अफसर बन जाएं तो उस घर की ठाट ही अलग होगी।
उत्तर प्रदेश के लालगंज क्षेत्र के योगेश अपनी इंजीनियरिंग के लिए प्रयागराज में मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान गए। उन्होंने यूपीएससी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और नोएडा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने चले गए। चार भाई-बहनों में क्षमा और माधवी की बहनें उदास दिख रही थीं क्योंकि वे यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास करने में असफल रही थीं, उनके भाई योगेश उन्हें दुःखी नहीं देख पा रहे थे और उन्होंने उनकी मदद करने का फैसला किया।
रक्षाबंधन के अवसर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने खुद यूपीएससी के लिए उपस्थित होने का फैसला किया, यह पता लगाया कि समस्या क्या थी और अपनी बहनों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने 2013 में अपनी नौकरी छोड़ दी और एक साल पूरी तरह यूपीएससी पर फोकस किया। अगले साल, उन्होंने इसे पहले ही अटेंप्ट में पास कर लिया और IAS अधिकारी बन गए। उन्होंने एग्जाम और नोट्स की अपनी समझ से अपनी दो बहनों और छोटे भाई को भी कोचिंग दी। 2015 में माधवी ने परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बन गईं। अगले साल, क्षमा और लोकेश दोनों ने एग्जाम क्लियर किया और अब आईपीएस और आईएएस अधिकारी हैं।
सबसे कम उम्र के लोकेश ने बताया कि 1980 और 90 के दशक में एक गांव लालगंज में बड़े होने वालों के लिए एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में यूपीएससी को सरकारी सेवा का सपना माना जाता था लेकिन जहां उनके माता-पिता हमेशा चाहते थे कि वे परीक्षा दें, उन्होंने कभी भी अपने सपनों को अपने बच्चों पर नहीं थोपा। चारो भाई बहन 12वीं तक हिंदी मीडियम से ही पढ़े हैं। योगेश अपनी इंजीनियरिंग के लिए प्रयागराज में मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान गए। उन्होंने यूपीएससी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और नोएडा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने चले गए, लेकिन जब उनकी बहनें, जो सिविल सेवा परीक्षा पास करने की इच्छुक थीं उनको दिक्कत आ रही थी तो वह खुद बाधाओं का सामना करते हुए मैदान में आ गए। बच्चों की मां कृष्णा मिश्रा कहती हैं कि हमारे बच्चे हमेशा बहुत मेहनती और ईमानदार रहे हैं। एक परीक्षा देने के बाद, उन्होंने हमें बताया कि यह अच्छी थी या नहीं, उन्हें उनकी दृढ़ता के लिए रिवार्ड मिला है।
BIG SUCCESS STORY ♦ “इंजीनियर बड़े भाई ने नौकरी छोड़ भाई बहनों को बनाया IAS-IPS, खुद भी क्लियर की परीक्षा, अब एक ही घर में सभी 4 बच्चे बडे़ अफसर”


