बडी़ खबर – ओमिक्रॉन के बीच आई “डेल्मिक्रॉन” की नई मुसीबत, फिर बढ़ने लगा कोरोना……अनवैक्सीनेटेड हो जाएँ सावधान….!
सीजी न्यूज आनलाईन डेस्क, 25 दिसंबर। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के केसेज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे हैं। यूरोप और अमेरिका में तेजी से पैर पसार रहा ओमिक्रॉन अब भारत में भी फैलने लगा है नतीजतन मध्यप्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया है। इसी बीच पिछले कुछ दिनों से कोरोना के सुपर स्ट्रेन डेल्मिक्रॉन की चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि डेल्मिक्रॉन ही अमेरिका और यूरोप में कोरोना के तूफानी गति से बढ़ने के लिए जिम्मेदार है। इस सुपर स्ट्रेन को लेकर कई विशेषज्ञ चिंता जता चुके हैं।
डेल्मिक्रॉन कोरोना का नया वैरिएंट नहीं है दरअसल, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट और ओमिक्रॉन वैरिएंट मिलकर एक ‘सुपर स्ट्रेन’ बना रहे हैं, जिसे डेल्मिक्रॉन कहा जा रहा है। एक ही व्यक्ति में डेल्टा और ओमिक्रॉन दोनों के संक्रमण से पैदा होने वाली स्थिति को ही डेल्मिक्रॉन कहा जा रहा है। डॉक्टर्स का मानना है कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग-डेल्टा और ओमिक्रॉन दोनों ही वैरिएंट से संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे ही लोगों के अंदर डेल्टा और ओमिक्रॉन के वायरस मिलकर नया सुपर स्ट्रेन डेल्मिक्रॉन बना रहे हैं। माना जा रहा है कि डेल्मिक्रॉन में डेल्टा और ओमिक्रॉन के जुड़वां स्पाइक प्रोटीन हैं। दोनों वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन होने की वजह से ही डेल्मिक्रॉन ज्यादा घातक असर दिखा रहा है। विदित हो कि स्पाइक प्रोटीन से ही कोरोना वायरस मानव शरीर की कोशिका में घुसने के दरवाजे खोलता है। अमेरिका और यूरोप में लगातार बढ़ रहे कोरोना केसेज भी डेल्मिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते खतरे ओर संकेत देते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेल्मिक्रॉन फैलने का खतरा कमजोर इम्यूनिटी वाले, बुर्जुगों और कमोर्बिडिटी (एक से अधिक बीमारियों से ग्रसित) लोगों में अधिक है। ऐसे लोग जिन्हें अब तक कोरोना वैक्सीन नहीं लगी है उनमें भी डेल्मिक्रॉन संक्रमण फैलने का खतरा है। ऐसे इलाके जहां वैक्सीनेशन कम हुआ, उस इलाके के लोगों पर भी डेल्मिक्रॉन कहर ढा सकता है। कई रिपोर्ट्स का मानना है कि अमेरिका और यूरोप में बढ़ते कोरोना मामलों के लिए डेल्टा + ओमिक्रॉन से बना डेल्मिक्रॉन ही जिम्मेदार है। दिसंबर के तीसरे हफ्ते तक अमेरिका के नए कोरोना केसेज में से 73% से अधिक ओमिक्रॉन के थे जबकि 26.6% ही डेल्टा के केसेज थे। अमेरिका में 20 दिसंबर को ओमिक्रॉन से पहली मौत हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका में बढ़ते कोरोना केसेज के पीछे डेल्टा या ओमिक्रॉन के बजाय डेल्मिक्रॉन भी जिम्मेदार हो सकता है यानि डेल्टा + ओमिक्रॉन से बना स्ट्रेन ही नए मामलों के बढ़ने के लिए जिम्मेदार है। ब्रिटेन में कोरोना की तेज रफ्तार के पीछे भी कहीं न कहीं ओमिक्रॉन + डेल्टा से बने सुपर स्ट्रेन डेल्मिक्रॉन को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। ब्रिटेन में अब तक ओमिक्रॉन से 7 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। कुछ एक्सपर्ट्स डेल्टा और ओमिक्रॉन के मिलने से सुपर स्ट्रेन बनने की बात से सहमत नहीं हैं लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस सुपर स्ट्रेन की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन बनाने वाली कंपनी मॉडर्ना के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर पॉल बर्टन ने कहा कि ये संभव है कि दोनों वैरिएंट जीन की अदला-बदली करके एक नया खतरनाक वैरिएंट बना चुके हों। डेली मेल के मुताबिक डॉ. बर्टन ने कहा कि साउथ अफ्रीका से पब्लिश कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में दोनों वैरिएंट होने की आशंका थी।
कुछ अन्य रिसर्चर्स ने भी चेतावनी दी है कि डेल्टा और ओमिक्रॉन का संयोजन होना दुर्लभ है लेकिन सही परिस्थितियां मिलने पर ऐसा संभव भी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के महामारी विशेषज्ञ पीटर व्हाइट ने भी सुपर स्ट्रेन की ऐसी संभावना को लेकर चेतावनी दी है।
भारत में अब तक ओमिक्रॉन के 350 से अधिक मामले सामने आए हैं लेकिन अभी भी देश के ज्यादातर कोरोना केसेज के लिए डेल्टा वैरिएंट ही जिम्मेदार है। ओमिक्रॉन दुनिया के कई देशों में तेजी से डेल्टा की जगह ले रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सुपर स्ट्रेन दुनिया के अन्य हिस्सों में असर दिखा रहा है तो ये भारत के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है हालांकि अभी ये कह पाना थोड़ा मुश्किल है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक महाराष्ट्र कोविड टास्क फोर्स के डॉ. शशांक जोशी ने कहा कि भारत में अभी डेल्टा ही प्रभावी वैरिएंट है। ओमिक्रॉन दुनिया के बाकी हिस्सों में तेजी से डेल्टा की जगह ले रहा है, लेकिन ये भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है कि डेल्टा और ओमिक्रॉन मिलकर भारत में कैसे व्यवहार करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्मिक्रॉन से उन लोगों को अधिक खतरा है जो कमजोर इम्यूनिटी वाले या अनवैक्सीनेटेड हैं। भारत में अभी तक करीब 38 फीसदी लोगों को कोरोना वैक्सीन की कोई डोज नहीं लगी है यानि देश में करोड़ों लोग अनवैक्सीनेटेड हैं, इन्हीं लोगों को कोरोना के सुपर स्ट्रेन डेल्मिक्रॉन फैलने पर सबसे ज्यादा खतरा होगा।

