बीएसपी कर्मियों के साथ हुआ पक्षपाती वेतन समझौता, एचआरए, छुट्टियाँ, पेंशन, पे-स्केल, रात्रि-भत्ता, एरियर्स मुद्दों को जा रहा टाला
भिलाई नगर 20 नवंबर । सभी बीएसपी कर्मियों का 58 महीनों से लंबित वेतन समझौता इस्पात मंत्रालय से अप्रुअल के बाद 18 नवम्बर को हो गया। लेकिन बीएसपी कर्मचारियों को सेल मैनेजमेंट के भेदभावपूर्ण वेज रिवीजन से इसमें भी निराशा ही हाथ लगी। एक ओर बीएसपी के अधिकारियों को 15% एमजीबी, 35% वैरियेबल पर्क्स और नए संशोधित बेसिक पर एचआरए दिया गया, तो वही दुसरे ओर बीएसपी कर्मियों को 13% एमजीबी और 26.5% वैरियेबल पर्क्स ही मिला। इसके अलावा बीएसपी कर्मियों के एचआरए, छुट्टियाँ, पेंशन, पे-स्केल, रात्रि-भत्ता, एरियर्स आदि मुद्दों को सब कमिटी में डालकर टाल जा रहा है।
अधिकारियों को एमजीबी के साथ साथ वैरियेबल पर्क्स का भी एरियर दिया गया, लेकिन बीएसपी कर्मचारियों को एमजीबी का ही एरियर दिया गया। इसके अलावा बीएसपी कर्मियों को LTA/LTC के रुप में मिली राशि को भविष्य में उनके मासिक वेतन से भी काटा जाएगा। एस 9 से एस 11 में कार्यरत वरिष्ठ कर्मियों का अपर ग्रेड पे स्केल की सीमा कम होने से उनका बेसिक का हिस्सा पर्सनल पे (PP) में जा रहा है, जिससे उनको वार्षिक इंक्रीमेंट का पूर्ण लाभ नहीं मिल रहा। सेल मैनेजमेंट के ऐसे सौतेले व्यवहार के वजह से सभी बीएसपी कर्मियों में असंतोष व्याप्त है और वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एमजीबी, पर्क्स और एरियर्स में अंतर ने ये साबित भी कर दिया है। 2 साल पहले वेज रिवीजन में देरी होने के समय भी अधिकारियों को लेपटाॅप और फर्नीचर एडवांस के रुप में वित्तीय लाभ दिया गया। इसके साथ ही उनको एक ग्रेड ऊपर का पदनाम दिया तथा उनकी छुट्टियाँ बढ़ाकर उनका उत्साह बढ़ाकर रखा गया। लेकिन इस समय हम सभी बीएसपी कर्मियों को किसी भी प्रकार का वित्तीय या गैर वित्तीय लाभ नहीं दिया गया, सेल मैनेजमेंट के इस दोहरे पक्षपाती निर्णयों से हम सभी बीएसपी कर्मी बहुत हतोत्साहित हुए हैं।
बीएसपी वर्कर्स युनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता ने कहा कि हम सभी बीएसपी कर्मी अधिकारियों के बराबर वेतन नहीं माँगते, लेकिन वेतन बढ़ने का दर तो अधिकारियों के बराबर होना ही चाहिए। बीएसपी सहित पुरे सेल में सेल मैनेजमेंट का ये भेदभाव साफ दिख रहा है।
ज्ञात हो कि वेतन समझौते हो रही देरी और बाकि पीएसयु की तरह ही 15% एमजीबी और 35% वैरियेबल पर्क्स के लिए बीएसपी कर्मियों ने हड़ताल, टुल-डाऊन, विरोध प्रदर्शन, रैली आदि किया, लेकिन बदले में उनको सस्पेंशन, ट्रांसफर, शो-काज नोटिस मिला और उन्हें वेज रिवीजन के नाम पर सेल मैनेजमेंट और NJCS युनियनों बीच 22 अक्टूबर को हुआ आधा-अधुरा MoU (जिसमें एरियर, एचआरए, छुट्टियाँ, रात्रि भत्ता, पेंशन आदि सुविधाओं को NJCS सब-कमिटी के भरोसे छोड़ दिया गया।
DPE की नियमावली का दुरुपयोग*
*सेल मैनेजमेंट ने कर्मचारियों के वेतन वृद्धि को पहले रोकने और फिर बाद में सीमित करने के लिए डिपार्टमेन्ट आॅफ पब्लिक इंटरप्राइजेस (DPE) के नियमों का गलत तरह से उपयोग किया। DPE के नियमावली के तहत सेल के हानि में रहने के कारण लगे अफोर्डिबिलीटि क्लाज में बीएसपी कर्मी नहीं आते, सिर्फ अधिकारी और नान युनिनाइज्ड सुपरवायजर ही आतें हैं। लेकिन फिर भी बीएसपी कर्मियों के वेतन समझौते को 58 महीनों तक टाला गया। सेल के लाभ में आने पर जब अफोर्डिबिलीटि क्लाज हटा तो DPE के नियमानुसार 15% एमजीबी और 35% वैरियेबल पर्क्स का लाभ सिर्फ अधिकारियों निःशर्त दिया गया। लेकिन बीएसपी कर्मियों 13% एमजीबी और 26.5% वैरियेबल पर्क्स थमाया गया, जिसके कारण सभी बीएसपी कर्मियों 4000 से 12000 तक का सैलरी में मासिक नुकसान होगा।
NJCS समिति पर सवालिया निशान
बीएसपी वर्कर्स युनियन अध्यक्ष श्री दत्ता ने कहा कि NJCS कमिटी हमारे वेतन, सुविधाओं और अधिकारों को दबाने के लिए ही बनाया गया। पिछले 6 महीनों के वेज नेगोशियेशन और अब तक हुए 4 वेतन समझौतों से तो यही पता चलता है। 1997 के वेतन समझौते में बीएसपी कर्मियों को 19.4% का ही सैलरी ग्रोथ मिला, वही अधिकारियों को 89.8% का सैलरी ग्रोथ मिला। इसके बाद 2007 के वेतन समझौते में 46% वैरियेबल पर्क्स नहीं दिया गया और 2012 के वेतन समझौते में नवनियुक्त बीएसपी कर्मियों की ग्रेच्युटी सीलिंग कर दी गई तथा एचआरए भी नए बेसिक के आधार पर ना देकर एचआरए के मुद्दे को NJCS सब कमिटी में डाल दिया गया। एचआरए के लिए बनी इस NJCS सब कमिटी की मीटिंग 2014 के बाद आज तक नहीं हुई, और ना ही एचआरए का मुद्दा आज 7 साल बाद भी हल नहीं हो पाया। NJCS समिति की नाकामी और सेल कर्मियों के अहित में हुए निर्णयों के कारण इस समिति का पुनर्गठन आवश्यक हो गया है।

