🔴शासन को ₹40 करोड़ से अधिक की क्षति
सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 24 जनवरी 2026। भारतमाला परियोजना अंतर्गत रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू-अर्जन मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत गिरफ्तार 03 लोकसेवकों के विरुद्ध प्रथम पूरक चालान आज विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रस्तुत किया गया है।
₹40 करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति का आरोप
ब्यूरो की विवेचना में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों के कृत्यों से शासन को कुल ₹39,65,89,257/- (लगभग ₹40 करोड़) की आर्थिक क्षति हुई है। मामले में अन्य आरोपियों के विरुद्ध विवेचना अभी सतत जारी है।
इन धाराओं में दर्ज है अपराध
प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध
धारा 7(सी), 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) एवं
धारा 409, 467, 471, 420, 120-बी भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
29 अक्टूबर 2025 को हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा),
लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी, ग्राम टोकरो, हल्का नं. 24) एवं
बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह)
को दिनांक 29.10.2025 को गिरफ्तार किया गया था।
बैकडेट बंटवारा व नामांतरण से बढ़ाया गया मुआवजा
विवेचना में सामने आया है कि आरोपियों ने लोकसेवक पद पर रहते हुए भूमाफियाओं एवं निजी व्यक्तियों से षड्यंत्र कर बैकडेट में बटवारा, नामांतरण एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखंडों में विभाजित दर्शाकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति निर्मित की गई।
तीनों आरोपियों की भूमिका से हुआ भारी नुकसान
दिनेश पटेल द्वारा खाता दुरुस्ती व प्रपत्र-10 के माध्यम से पद का दुरुपयोग कर शासन को ₹30,82,14,868/- की क्षति।
लेखराम देवांगन द्वारा मूल खसरों को कृत्रिम उपखंडों में दर्शाकर ₹7,16,26,925/- की क्षति।
बसंती घृतलहरे द्वारा अवार्ड चरण में कूटरचित विभाजन कर ₹1,67,47,464/- की क्षति।
अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा तय
ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण में शामिल अन्य लोकसेवकों एवं मुआवजा प्राप्तकर्ताओं की भूमिका की जांच जारी है और विवेचना पूर्ण होने पर आगे भी चालान प्रस्तुत किए जाएंगे।

