जीआरपी के बर्खास्त आरक्षकों की संपत्ति पर एंटी करप्शन ब्यूरो की नजर, जांच पहुंची रिश्तेदारों के घरों तक

जीआरपी के बर्खास्त आरक्षकों की संपत्ति पर एंटी करप्शन ब्यूरो की नजर, जांच पहुंची रिश्तेदारों के घरों तक


सीजी न्यूज ऑनलाइन 03 दिसंबर। गांजे की तस्करी में बर्खास्त किए गए जीआरपी के चार आरक्षकों की संपत्ति की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने उनके साथ उनके ससुराल और रिश्तेदारों की संपत्तियों पर भी नजरें टिका दी हैं। दूसरे दिन एसीबी ने सभी जब्त दस्तावेजों का मिलान किया और बैंक खातों में हुए लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है।

ये चारों आरक्षक जीआरपी की एंटी क्राइम यूनिट में तैनात थे और इस विशेष टीम के पद का दुरुपयोग कर गांजे की तस्करी में लिप्त पाए गए। हालांकि, एटीएस टीम की सतर्कता के चलते वे पकड़ में आ गए। डीजीपी के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए एसपी ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। इसके बाद रविवार तड़के एसीबी ने उनके घरों पर छापा मारा। इस दौरान बड़ी मात्रा में संपत्ति के दस्तावेज, बैंक खातों की डिटेल, कीमती जेवर और वाहन बरामद किए गए।

जांच में सबसे अधिक संपत्ति मन्नू प्रजापति और लक्ष्मण गइन के ठिकानों से मिली है। संतोष राठौर के घर पर सिर्फ उसके रिश्तेदार मौजूद थे, जो हाल
ही में उसकी पत्नी की डिलीवरी के बाद उसे देखने आए थे। एसीबी ने उनसे ज्यादा पूछताछ नहीं की।

इन आरक्षकों के खिलाफ एक साल पहले आईजी को शिकायत मिली थी, जिसमें उनके महंगे शौक और संपत्तियों का उल्लेख था। शिकायत के अनुसार, इनकी संपत्तियों में टाटा हैरियर, किया करेंस, हार्ले डेविडसन बाइक और अन्य कीमती निवेश शामिल हैं। अब एसीबी उनके परिवार और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर चल रही संपत्तियों की भी जांच कर रही है।

आरक्षकों के इस गोरखधंधे में कुछ आदतन अपराधी भी शामिल थे, जो गांजे को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और लेनदेन का हिसाब रखने में उनकी मदद करते थे। इनके पास से कई बैंक खातों के एटीएम कार्ड भी बरामद हुए हैं। चर्चा है कि अब यही लोग आरक्षकों को कानूनी सहायता दिलाने के लिए रकम जुटा रहे हैं।

चारों आरक्षकों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है। बर्खास्तगी के खिलाफ वे कोर्ट जाने की तैयारी में थे, लेकिन आय से अधिक संपत्ति के नए मामले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।