दुर्ग, 18 जून । दुर्ग के जिला सिटी हॉस्पिटल में सीनियर नर्सिंग स्टाफ मेंबर्स और अन्य सदस्यों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

ट्रांसजेंडर मुद्दों पर कार्य कर रही “संघर्ष एक जीवन समिति” द्वारा जिला स्वास्थ्य अधिकारी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला में सर्वप्रथम ट्रांसजेंडर मुद्दों पर कार्य कर रही डाक्टर सुचित्रा शर्मा ने ट्रांसजेंडर इन्हें क्यों कहते हैं और यह किस प्रकार से सामाजिक जीवन में अपने आप को हाशिए पर खड़ा पाते हैं। विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर अस्पताल में उनके लिए कोई अलग से ना तो क्लीनिक है और ना ही कोई वार्ड जहां गंभीर स्थिति होने पर वह भर्ती होकर अपना इलाज कर सके। क्योंकि उनके समक्ष स्वयं की जेंडर पहचान को लेकर वैसे भी संघर्षात्मक स्थिति होती है, इसलिए कई बार अस्पताल में अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ट्रांसजेंडर समुदाय से इस समिति की कंचन सेंद्रे ने विस्तृत रूप से अपने समूह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर के विस्तृत चर्चा की और बताया कि कई बार उन्हें अपने परेशानियों को लेकर के कोई सही निर्देशन मार्गदर्शन नहीं मिलता है। साथ ही उन्होंने स्टाफ द्वारा पूछे गए कई शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
जिला अस्पताल की सीनियर नर्सिंग मेंट्रेन श्रीमती चित्रलेखा बोरकर ने इस संघर्ष एक जीवन समिति के सदस्यों का बहुत-बहुत धन्यवाद दिया कि हम लोग के सामने कई बार ट्रांसलोगों के आने से कई विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और डर से कई बार हमारा स्टाफ उनसे दूरी बनाता था। और हम लोग डरते थे कि हम उनके साथ कैसे इनका इलाज करें।

हमारी विवेचना से उन्हें काफी तसल्ली व और उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि अब उन्हें इनका इलाज करने में कोई परेशानी नहीं होगी और हम अपने उच्च अधिकारियों से बात करेंगे कि ट्रांसजेंडर समूह के लोगों के लिए एक कक्ष और वार्ड की व्यवस्था हो ताकि वहां वह स्वतंत्र रूप से और सहजता के साथ अपना इलाज करा सके। इस कार्यक्रम में डॉक्टर सुचित्रा शर्मा कंचन सेंद्रे, चांद, हसीना, और पूजा समिति की ओर से और सोनम राजपूत शोध छात्रा के स्टाफ की मुख्य मेट्रन श्रीमती चित्रलेखा बोरकर और काफी मात्रा में नर्सिंग स्टाफ तथा अस्पताल स्टाफ उपस्थित था।

