पत्रकारिता की आड़ में दबंगई, वसूली का आरोप, पंचायत प्रतिनिधियों ने SP को सौंपा ज्ञापन

पत्रकारिता की आड़ में दबंगई, वसूली का आरोप, पंचायत प्रतिनिधियों ने SP को सौंपा ज्ञापन


🔴सरपंच व पंचों ने शासकीय कार्य में बाधा डालने वाले युवक पर की सख्त कार्रवाई की मांग

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 04 फरवरी 2026। जिले में पत्रकारिता की आड़ लेकर शासकीय कार्यों में बाधा डालने और पंचायत प्रतिनिधियों से वसूली करने का गंभीर मामला सामने आया है। नवागढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटपुरा में एक युवक द्वारा स्वयं को पत्रकार बताकर विकास कार्य रुकवाने, धमकी देने और पैसों की मांग करने का आरोप लगा है। मामले को लेकर ग्राम पंचायत की सरपंच सुचिता देवी राठौर ने पंचों के साथ पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा को ज्ञापन सौंपते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सरपंच द्वारा दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, 02 फरवरी 2025 को ग्राम पंचायत पुटपुरा के वार्ड क्रमांक 05 में सीसी रोड निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान ग्राम तिलई निवासी दीपक तिवारी नामक युवक मौके पर पहुंचा और स्वयं को पत्रकार बताते हुए पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने लगा। आरोप है कि युवक ने मजदूरों को काम बंद करने के लिए उकसाया, मौके पर मौजूद महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज करते हुए माहौल बिगाड़ दिया। हंगामे के चलते सीसी रोड निर्माण कार्य घंटों तक बाधित रहा।


शिकायत में यह भी उल्लेख है कि उक्त युवक बाद में सरपंच के निवास पहुंचा और पत्रकारिता का भय दिखाकर कथित विज्ञापन के नाम पर पैसों की मांग करने लगा। जब पंचायत स्तर पर अन्य सरपंचों से जानकारी ली गई तो सामने आया कि दीपक तिवारी जिले के किसी भी मान्यता प्राप्त समाचार पत्र, चैनल या मीडिया संस्थान से जुड़ा नहीं है। इससे पत्रकारिता के नाम पर फर्जीवाड़ा कर पंचायतों से वसूली किए जाने की आशंका गहराई है।
सरपंच सुचिता देवी राठौर ने शिकायत में स्पष्ट कहा है कि यदि ऐसे फर्जी पत्रकारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो पंचायत एवं अन्य शासकीय विकास कार्यों में लगातार बाधाएं उत्पन्न होती रहेंगी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीर जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, उक्त युवक द्वारा अन्य जगहों पर भी दबाव बनाने और वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है।
अब सवाल यह है कि पत्रकारिता की साख से खिलवाड़ करने वाले ऐसे नकाबपोशों पर कानून का शिकंजा कसेगा या फर्जी पहचान के सहारे वसूली का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?