4 साल की लंबी लड़ाई के बाद कल्याण महाविद्यालय के प्राध्यापक को मिला न्याय, अब देना पड़ेगा कल्याण महाविद्यालय को चार करोड़, 200 कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ, मामला भविष्य निधि भुगतान का

4 साल की लंबी लड़ाई के बाद कल्याण महाविद्यालय के प्राध्यापक को मिला न्याय, अब देना पड़ेगा कल्याण महाविद्यालय को चार करोड़, 200 कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ, मामला भविष्य निधि भुगतान का


4 साल की लंबी लड़ाई के बाद कल्याण महाविद्यालय के प्राध्यापक को मिला न्याय, अब देना पड़ेगा कल्याण महाविद्यालय को चार करोड़, 200 कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ, मामला भविष्य निधि भुगतान का

भिलाई नगर 13 अगस्त । कल्याण महाविद्यालय लंबे समय से अपने कर्मचारियो और मानसेवी  प्राध्यापकों को भविष्य निधि का भुगतान नहीं कर रहा था। जिसकी शिकायत महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक नितेश गुप्ता के द्वारा वर्ष 2018 में की गई ।   

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय , रायपुर द्वारा मामले को संज्ञान में लिया और कल्याण महाविद्यालय को समन जारी कर मामले की जांच प्रारंभ किया गया।

भविष्य निधि कार्यालय के प्रवर्तन अधिकारी अधिकारी ने शिकायत को आधार बनाकर, कई चरणों में जांच की और पाया कि कर्मचारियों एवं प्राध्यापकों के हक के पैसों का महाविद्यालय प्रबंधन लंबे समय से दुरुपयोग करता आ रहा है। और अपने किसी भी कर्मचारी को भविष्य निधि का भुगतान न कर नियमों की अवहेलना कर रहा है।

 प्रवर्तन अधिकारी ने बताया के महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य वाईआर कटरे, आर के साहू, यदुनंदन पटेल आदि प्राचार्यो ने इस मामले में भविष्यनिधी विभाग की जांच में सहयोग नहीं किया  एवं महाविद्यालय प्रबंधन अपनी ओर से इस मामले में लीपा – पोती करने में लगा रहा । जिस हेतु नवंबर 2021 में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के कारण महाविद्यालय पर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय द्वारा  5000 रुपए पेनाल्टी भी लगाई गई।

मामले पर महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा अपनी पकड़ ढीली होता देख महाविद्यालय के वर्तमान प्राचार्य  डॉक्टर आरपी अग्रवाल द्वारा अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया गया और 22 जुलाई 2022 की सुनवाई में महाविद्यालय ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कर्मचारियों की भविष्य निधि को ब्याज समेत देने के लिए लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। 

 क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त  विकास गुप्ता द्वारा,  कल्याण महाविद्यालय को 1 करोड़ 47 लाख रुपए तत्काल जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने भविष्य निधि की धारा 7Q, के तहत 12% वार्षिक ब्याज तथा 14B के तहत 25% पेनल्टी की राशि जमा करने के लिए भी आदेश किया है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि महाविद्यालय प्रबंधन को मूलधन ब्याज एवं पेनल्टी की राशि के रूप में  अनुमानित 4 करोड़ से भी ज्यादा की राशि भुगतान करनी पड़ेगी।

भविष्य निधि आयुक्त विकास गुप्ता से प्राप्त आदेश से  महाविद्यालय के लगभग 200 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा ।  लंबे समय बाद  मानसेवी प्राध्यापकों को उनका अधिकार मिलने के आदेश से उनमें खुशी की लहर व्याप्त है।

क्या है भविष्य निधि अधिनियम की? धारा 7Q, तथा 14B 

7Q नियोक्ता द्वारा देय ब्याज।—नियोक्ता बारह प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। प्रति वर्ष या इस अधिनियम के तहत उसके द्वारा देय किसी भी राशि पर योजना में निर्दिष्ट की जा सकती है, जिस तारीख से राशि उसके वास्तविक भुगतान की तारीख तक देय हो गई है: बशर्ते कि निर्दिष्ट ब्याज की उच्च दर योजना किसी अनुसूचित बैंक द्वारा ली जाने वाली ब्याज की उधार दर से अधिक नहीं होगी।

14B अधिनियम की धारा के तहत नियोक्ता द्वारा भविष्य निधि की राशि का देर से भुगतान करने के लिए 25% की पेनल्टी का प्रावधान है।

भविष्य निधि कार्यालय में शिकायत करने वाले मुख्य शिकायतकर्ता श्री नीतिश गुप्ता से चर्चा करने पर उन्होंने बताया  कि- शिकायत करने के बाद  उन्हें महाविद्यालय के तत्कालिक प्राचार्य एवं वरिष्ठ प्राध्यापकों द्वारा उन्हें मानसिक यातनाएं दी गई , नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया, बावजूद इसके उन्होंने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी और आज परिणाम उनके पक्ष में है । उन्होंने यह भी बताया कि महाविद्यालय द्वारा इतनी यातनाएं सहने के बाद भी उन्होंने महाविद्यालय के हित में सोचा और महाविद्यालय को 3 करोड़ का आर्थिक लाभ पहुंचाया है।

शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा 1992 से 2019 तक की भविष्य निधि की मांग की गई थी किंतु महाविद्यालय द्वारा अनुनय – विनय करने तथा प्राचार्य द्वारा महाविद्यालय के पास फंड की कमी होने का हवाला देते हुए नितेश गुप्ता से मदद करने का निवेदन किया जिस पर  शिकायतकर्ता गण ने  2004 से भविष्य निधि प्रदान करने के लिए अपनी सहमति प्रदान की।   इस प्रकार महाविद्यालय ने कूट रचना कर कर्मचारियों के हक के लगभग 3 करोड रुपए और बचा लिए , अन्यथा महाविद्यालय को लगभग 7 करोड़ की राशि भुगतान करनी पड़ती ।  फिर भी शिकायतकर्ता गण भविष्य निधि आयुक्त के फैसले से बहुत खुश हैं और उन्होंने महाविद्यालय के वर्तमान प्राचार्य  डॉक्टर आरपी अग्रवाल का  आभार व्यक्त किया है । कि उन्होंने महाविद्यालय को बहुत बड़ी आर्थिक क्षति  से बचा लिया , क्योंकि भविष्य निधि की धाराओं के अनुसार  प्रतिमाह 1%   की दर से पेनल्टी की राशि वृद्धि हो रही थी मतलब लगभग ₹4 लाख  प्रति माह की दर से यह राशि बढ़ रही थी।