हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में 01 जुलाई से स्थापित होगी आचार्य नरेंद्र देव वर्मा शोधपीठ
दुर्ग 28 अप्रैल । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में अगामी प्रशिक्षण सत्र में 01 जुलाई से आचार्य नरेंद्र देव वर्मा शोध पीठ आरंभ की जायेगी। इस की घोषणा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल ने विश्वविद्यालय की के 24 अप्रैल को आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह में की थी। इस शोधपीठ का संचालन हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग शोधपीठ संबंधी विनियम क्रमांक 45 के अंतर्गत किया जायेगा। यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेन्द्र कुलदीप ने बताया कि शोधपीठ के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण अकादमिक कार्यक्रम में अध्यापन, अनुसंधान, प्रशिक्षण प्रचार-प्रसार, समाज से सरोकार एवं प्रकाशन इत्यादि गतिविधियां शामिल होंगे।
श्री कुलदीप के अनुसार विश्वविद्यालय की विद्या परिषद एवं कार्य परिषद द्वारा अनुमोदित इस शोधपीठ के संचालन हेतु एक सलाहकार मंडल गठित किया जायेगा। जिसकी कुलपति अध्यक्ष होंगी। इसके अलावा सलाहकार मंडल में एक निदेशक दो बाह्य विषेषज्ञ, विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के दो सदस्य, विश्वविद्यालय विद्या परिषद के दो सदस्य, विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों में से एक प्राचार्य तथा स्वर्गीय डाॅ. नरेन्द्रदेव वर्मा को जानने एवं समझने वाले एक व्यक्ति तथा कुलसचिव सदस्य के रूप में शामिल होंगे। तीन वर्ष की अवधि वाले इस सलाहकार मंडल की अनुशंसा पर निदेशक की नियुक्ति कार्य परिषद द्वारा की जा सकेगी।
श्री कुलदीप ने बताया कि शोधपीठ हेतु वित्तीय व्यवस्था राज्य शासन एवं केंद्र शासन अथवा अन्य संस्थाओं से प्राप्त अनुदान से की जायेगी। अति आवश्यक होने पर विश्वविद्यालय द्वारा भी अपने बजट से समुचित रांची की व्यवस्था की जा सकती है। किसी भी प्रकार के बिन्दु पर अनिवार्य अथवा भ्रम की स्थिति में विश्वविद्यालय की कुलपति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।
श्री कुलदीप के अनुसार 04 नवंबर 1939 को जन्मे आचार्य नरेंद्र देव वर्मा को सागर विश्वविद्यालय तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से पीएचडी की उपाधि क्रमश 1966 एवं 1973 में प्रदान की गई थी। स्वर्गीय वर्मा छत्तीसगढ़ी भाषा एवं अस्मिता की पहचान बनाने वाले गंभीर कवि थें। स्वर्गीय वर्मा की ख्याति एक कवि, नाटककार, उपन्यासकार, कथाकार, समीक्षक एवं भाषाविद् के रूप में हैं। डाॅ. नरेन्द्रदेव वर्मा द्वारा लिखे गये गीत ’’अरपा पैरी के धार’’ को 2019 में छत्तीसगढ़ प्रदेश का राज्य गीत घोषित किया गया। डाॅ. वर्मा ने शासकीय डी.बी. गर्ल्स काॅलेज, रायपुर तथा साइंस काॅलेज, दुर्ग में हिन्दी के प्राध्यापक के रूप में अपनी लंबी सेवाएं दी थीं।

