“11 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ में फेडरेशन की 3 दिवसीय महाहड़ताल शुरू

“11 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ में फेडरेशन की 3 दिवसीय महाहड़ताल शुरू


🛑4.10 लाख कर्मचारियों अधिकारियों ने काम से बनाई दूरी, दुर्ग मुख्यालय में प्रदर्शन जारी

दुर्ग, 29 दिसंबर। छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और
अधिकारियों की वर्षों से लंबित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। प्रदेश के 4 लाख 10 हजार से अधिक कर्मचारी-अधिकारी आज से तीन दिन तक हड़ताल पर चले गए हैं। इस आंदोलन के कारण राज्य के लगभग सभी विभागों का कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। दफ्तर सुने हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की तीन दिवसीय निश्चित कालीन हड़ताल आज से प्रारंभ हो गई है। पूरे प्रदेश की भांति दुर्ग जिले में भी इसका व्यापक असर दिख रहा है। सभी दफ्तर सूने पड़े हुए हैं और दुर्ग जिले के कर्मचारियों के द्वारा जिला मुख्यालय में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर स्थल पर धरना एवं प्रदर्शन किया जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर सभी अधिकारी कर्मचारी एकजुट होकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं और लगातार मोदी की गारंटी पूरा की पुरजोर मांग की जा रही है।

इस संबंध में फेडरेशन दुर्ग संभाग प्रभारी के राजेश चटर्जी ने कहा कि शासन से दो दौर की बातचीत हो चुकी है। परंतु अभी तक उनकी मांग पूरी नहीं की गई है। सरकार के द्वारा वित्तीय स्थिति ठीक नहीं होने का राग अलापा जा रहा है। हमारे द्वारा कोई अतिरिक्त मांग नहीं की जा रही है। जो केंद्र सरकार के द्वारा महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। 1 जुलाई से उसका भुगतान राज्य शासन। दूसरा नगरी निकाय के कर्मचारियों को विगत 2 से 3 महीने का वेतन नहीं मिला है। जबकि कर्मचारियों के द्वारा राजस्व की वसूली की जा रही है उसके बावजूद नियमित वेतन नहीं दिया जाना अनुचित है। 300 दिन EL दी जाए जिसे मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा लागू किया गया है। राजेश चटर्जी ने आरोप लगाया कि सरकार हमारी मांगों को नजर अंदाज कर रही है। ऐसे में हड़ताल होना निश्चित है।

छत्तीसगढ़ राज्यपत्रित कर्मचारी संघ दुर्ग जिला इकाई के अध्यक्ष रूपेश पांडे छत्तीसगढ़ के 33 जिलों के 4.10 लाख अधिकारी, कर्मचारी, नियमित, अनियमित, कार्यभारित्र एवं आकस्मिक निधि के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित हैं। 11 सूत्रीय मांगों में मुख्य रूप से कैशलेस मेडिकल सुविधा महंगाई भत्ता कार्यभारित एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों के नियमित कारण की मांग की जा रही है यह मांगे बिहार जैसे बीमारू राज्य में पुरी की गई है ऐसे में छत्तीसगढ़ जैसे संपन्न राज्य में आसानी से पूरी की जा सकती है। इस हड़ताल से पूरे राज्य के ढाई करोड़ लोगों को नुकसान हो रहा है। क्योंकि इस हड़ताल में मैदानी कर्मचारी ग्रास रूट लेवल के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। खेती किसानी का सीजन है इसलिए कृषि प्रभावित होगी। सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी। स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। प्रत्यक्ष प्रत्यक्ष तौर पर पूरे प्रदेश के ढाई करोड़ लोगों का नुकसान हो रहा है।