भारत बंद के समर्थन में सतनाम भवन सेक्टर 6 से निकाली रैली, कलेक्टोरेट पहुंच राष्ट्रपति के नाम सौपा ज्ञापन

भारत बंद के समर्थन में सतनाम भवन सेक्टर 6 से निकाली रैली, कलेक्टोरेट पहुंच राष्ट्रपति के नाम सौपा ज्ञापन


भिलाई नगर 21 अगस्त । भारत बंद के आह्वान पर भिलाई के सेक्टर 6 सतनाम भवन में अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए। भारत बैंड के समर्थन में यहां से रैली निकल गई। एक समूह बाइक से बाजारों को बंद कराने के लिए रवाना हुआ। दूसरा ग्रुप पैदल और वाहनों से ही कलेक्टोरेट के लिए चल पड़ा। सुपेला घड़ी चौक, कोसानाला होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे। इस रैली में बीएसपी एससी एसटी एम्पलाइज एसोसिएशन भी शामिल हुआ। बी एस पी, एस सी /एस टी एम्प एसोसिएशन के अध्यक्ष कोमल प्रसाद के नेतृत्व मे केंद्र सरकार के सह पर उच्च न्यायलय द्वारा एससी एसटी आरक्षण मे कृमिलेयर व वर्गीकरण का जो आदेश दिया गया है उसके खिलाफ राष्ट्रपति के नाम दुर्ग अपर कलेक्टर बजरंग दुबे को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में उल्लेखित किया गया कि भारत मे सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक व राजनीतिक समानता हेतु भारतीय संविधान मे अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग को लोकसभा मे संविधान के अनुच्छेद 330 मे तथा विधानसभा मे संविधान के अनुच्छेद 332 मे राजनीतिक आरक्षण की व्यवस्था की गई थी उसी प्रकार अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के सदस्यो को शासकीय सेवा मे दावे हेतु संविधान के अनुच्छेद 335 मे व्यवस्था की गई थी एवं संविधान के अनुच्छेद 341 मे अनुसूचित जाति को तथा संविधान के अनुच्छेद 342 मे अनुसूचित जनजाति को शासकीय अर्धशासकीय व केंद्र की सेवाओ मे आरक्षण प्रदान किया गया था।

डा.बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर द्वारा इस राजनीतिक व शासकीय सेवा मे आरक्षण की व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य भारत मे सामाजिक समानता स्थापित करना था जो कि आज की परिस्थिति मे भी यह उद्देश्य पूर्ण नही हो पाया है। संविधान मे राजनीतिक आरक्षण व सेवाओ मे आरक्षण वंचित व पीड़ित जाति को दिया गया है ना कि अमीर और गरीब की श्रेणी को। वर्तमान स्थितयो मे भी भारत के विभिन्न राज्यो मे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के साथ भेदभाव व अत्याचार बदस्तूर जारी है । जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत मे सामाजिक समानता आज पर्यंत स्थापित नही हो पाई है, आज भी इन वर्गो के अनेक आईएएस आईपीएस अधिकारी भेदभाव व प्रताड़ना के शिकार हो रहे है तथा राजनीतिक क्षेत्र मे भी इन वर्गो के अनेक राजनीतिक जन प्रतिनिधियो की जातिगत आधार पर अनदेखी की जाती है वे उपेक्षा का शिकार होकर बेबस बने रहते है। इसलिए यह मानना कि वे क्रीमीलेयर है और उन्हे क्रीमीलेयर मानकर आरक्षण की सुविधाओ से वंचित करना व उप वर्गीकरण करना उनके संवैधानिक हितो पर कुठाराघात है। केन्द्र सरकार की सह पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया यह निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से श्रेयस्कर नही है।

इस निर्णय से अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग हताश निराश व आक्रोशित है। वर्ष 2018 मार्च मे एससी एसटी एक्ट को निष्प्रभावी किये जाने के संबंध मे सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया निर्णय व उसके बाद 2 अप्रैल 2018 को उपजे देशव्यापी आंदोलन का स्मरण करे, कही पुनः देश मे ऐसे उग्र प्रदर्शन व आंदोलन की पुनरावृत्ति ना हो जाये।*
अत अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के संवैधानिक हितो को ध्यान मे रखते हुए इन वर्गो के आरक्षण मे क्रीमीलेयर लागू कर उप वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिये गये निर्णय को समाज हित, जन हित व देश हित मे वापस लिये जाने की अनुशंसा करने का कष्ट करेंगे। आरक्षण को वर्गीकृत ना कर इसे यथावत ही रखे, अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग सदैव आपका आभारी रहेगा।

प्रमुख मांगे इस प्रकार है:-

1- आरक्षण मे क्रीमीलेयर लागू नही किया जावे तथा उप वर्गीकरण नही किया जावे। अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के सभी सदस्यो के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रखते हुए आरक्षण को यथावत रखा जावे।
2- विशेष भर्ती अभियान चलाकर एससी एसटी का बैकलॉग शीघ्र पूर्ण किया जाये।
3- अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाये।
4- केन्द्रीय मंत्रालय में सीधी भर्ती बंद की जाये।
5- काॅलेजियम सिस्टम व परीक्षा मे लेटर एंट्री सिस्टम समाप्त किया जाये।
इस प्रतिनिधि मंडल मे अध्यक्ष कोमल प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष चेतन लाल राना, उपाध्यक्ष वेद प्रकाश सूर्यवंशी, कोषाध्यक्ष अनिल खेलवार, बहादुर जायसवारा आदि शामिल थे l