🔴पश्चिमी देशों का प्रस्ताव पास
सीजी न्यूज ऑनलाइन, 24 जनवरी 2026। इतिहास को देखें थो भारत ने 2005 और 2009 में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) में ईरान के खिलाफ वोट किया था, ताकि उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को UN सिक्योरिटी काउंसिल के पास भेजा जा सके। भारत ने उस वक्त अमेरिकी प्रेशर की वजह से ईरान के खिलाफ वोट डाला था।
यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट काउंसिल (UNHRC) में भारत ने ईरान पर पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला है। भारत के साथ साथ चीन और पाकिस्तान ने भी प्रस्ताव के खिलाफ ‘NO’ वोट किया है। हालांकि भारत, चीन और पाकिस्तान के समर्थन के बावजूद UNHRC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी जांच को और गहरा करने का फैसला किया है। इसमें बच्चों सहित हजारों लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में ईरान से “क्रूर दमन” खत्म करने की मांग भी की गई है।
UNHRC में कुल 47 सदस्य देश हैं, जिन्होंने इस प्रस्ताव के जरिए ईरान में “सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के अभूतपूर्व पैमाने” पर चिंता जताई है। ईरान के खिलाफ लाए गये पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के समर्थन में 25 वोट, विरोध में 7 वोट और 15 देशों ने वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया है। भारत, चीन और पाकिस्तान ने विरोध में यानि NO में वोट किया है। प्रस्ताव पास होने के बाद अब ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सबूत इकट्ठा करने वाले स्वतंत्र जांचकर्ताओं के जनादेश को बढ़ाने और व्यापक बनाने का फैसला किया गया है।
UNHRC में ईरान के समर्थन में भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन की जांच कर रहे स्वतंत्र जांचकर्ताओं के कार्यकाल को बढ़ाने के प्रस्ताव पर भारत उन सात देशों (चीन और पाकिस्तान सहित) में से एक था, जिसने “नहीं” में वोट दिया। इसे ऐसे मानवाधिकार प्रस्तावों पर भारत के पारंपरिक “गैर-हाजिर” (तटस्थ) रुख से एक बदलाव के रूप में देखा गया। इससे पहले भारत अकसर ऐसे मामलों पर वोट नहीं करता था। हालांकि ईरान को लेकर भारत का रूख बरकरार रहा है। भारत ने ईरान का समर्थन ही किया है। इससे पहले भी नवंबर 2025 में भारत ने यूएन जनरल असेंबली में पहले “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति” से जुड़े थर्ड कमेटी के प्रस्ताव के खिलाफ वोट देकर, ईरान का समर्थन करने की अपनी नीति को बरकरार रखा था।
इतिहास को देखें थो भारत ने 2005 और 2009 में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) में ईरान के खिलाफ वोट किया था, ताकि उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को UN सिक्योरिटी काउंसिल के पास भेजा जा सके। माना जाता है कि भारत ने उस वक्त ईरान के खिलाफ वोटिंग की थी, क्योंकि उसपर भारत-अमेरिका न्यूक्लियर डील के बाद बना प्रेशर था। हालांकि उसके बाद करीब एक दशक तक भारत, ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहने की नीति के साथ चला। भारत ने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का विरोध किया और वोटिंग से दूरी बनाए रखी। लेकिन 2023 के बाद ईरान को लेकर भारत के रूख में और परिवर्तन आया। भारत ने अब पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले ईरान की निंदा करने वाले प्रस्तावों के खिलाफ वोट देना शुरू कर दिया है। माना जाता है कि ग्लोबल साउथ के नजरिए से भारत ऐसा कर रहा है। इसके अलावा, चीन और पाकिस्तान भी ईरान का समर्थन करते हैं, इसलिए भारत क्षेत्रीय समीकरणों के खिलाफ नहीं जाना चाहता।

