यूजीसी ने पीएचडी थीसिस नकल रोकने बनाये कड़े नियम, पकड़े जाने पर शोधार्थी पर 1 से 3 वर्ष तक का प्रतिबंध, शोध निर्देशक पर वेतन वृद्धि रोकने एवं गाइडशिप से 3 वर्ष तक वंचित रखने का प्रावधान

यूजीसी ने पीएचडी थीसिस नकल रोकने बनाये कड़े नियम, पकड़े जाने पर शोधार्थी पर 1 से 3 वर्ष तक का प्रतिबंध, शोध निर्देशक पर वेतन वृद्धि रोकने एवं गाइडशिप से 3 वर्ष तक वंचित रखने का प्रावधान


यूजीसी ने पीएचडी थीसिस नकल रोकने बनाये कड़े नियम, पकड़े जाने पर शोधार्थी पर 1 से 3 वर्ष तक का प्रतिबंध, शोध निर्देशक पर वेतन वृद्धि रोकने एवं गाइडशिप से 3 वर्ष तक वंचित रखने का प्रावधान

 

दुर्ग 30 नवंबर । पीएचडी कोर्स में नकल रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कड़े नियम बनाए गए हैं। जिसके तहत शोधार्थी एवं शोध निर्देशक दोनों ही को दंड देने का प्रावधान किया गया है। जिसमें शोधार्थी को 1 से 3 वर्ष तक शोध कार्य में प्रतिबंध लगाने एवं शोध निर्देशक वेतन वृद्धि रोकने एवं शोध कार्य से वंचित रखने के प्रावधान किए गए हैं। इस ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि शोधार्थी को अपना मौलिक कार्य ही करना होगा । साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को प्लेजियारिज्म डिसीप्लीनरी अथाॅरिटी (पीडीए) का गठन करने का भी निर्देश दिया गया है।

 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नई दिल्ली द्वारा विश्वविद्यालय एवं अन्य शोध संस्थानों में थीसिस की नकल रोकने हेतु कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जारी ड्राफ्ट के अनुसार अब यदि किसी सुधार थी की पीएचडी थीसिस में प्लेजियारिज्म अर्थात नकल पायी जाती है तो उस शोधार्थी के साथ-साथ उसके रिसर्च गाइड पर भी कार्यवाही की जायेगी। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव, डाॅ. सी.एल.देवांगन ने बताया कि विष्वविद्यालय में शोध कार्य कर रहे सभी शोधार्थी एवं उनके शोध निर्देशक यूजीसी के नये नियमों से अवगत रहें। यूजीसी द्वारा बनाये नये पीएचडी नकल रोकने संबंधी ड्राफ्ट में शोधार्थियों एवं उनके शोध निर्देशको पर तीन चरणों में पेनाल्टी लगाने का प्रावधान किया गया है। यह पेनाल्टी सुधार थी द्वारा की गई नकल की प्रकृति एवं उसके प्रतिशत पर आधारित होगी। यूजीसी के अनुसार प्रथम लेवल की पेनाल्टी में शोधार्थी द्वारा प्रकाशन हेतु उपलब्ध कराये गये शोध कार्य को वापस लेना होगा। तथा वह 1 वर्ष की अवधि  तक कोई भी शोध निष्कर्ष को कहीं प्रकाशित नहीं कर सकेगा। द्वितीय लेबल की पेनाल्टी में शोधार्थी द्वारा प्रकाशन हेतु उपलब्ध कराये गये शोध कार्य को वापस लेने के साथ-साथ दो वर्ष तक कोई भी शोध कार्य को न कर पाने संबंधी पेनाल्टी का प्रावधान है। साथ ही सेवा में कार्यरत सुधार थी एवं शोध निर्देशक की एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। इसके अलावा व शोध निर्देशक दो वर्ष तक किसी भी शोधार्थी का रिसर्च गाइड नहीं बन पायेगा।

तीसरे लेवल की पेनाल्टी में शोधार्थी द्वारा प्रकाशन हेतु प्रस्तुत शोध कार्य के प्रकाशन पर 3 वर्ष तक प्रतिबंध रहेगा। तथा सेवारत् शोधार्थी एवं शोध निर्देशको के दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकने का प्रावधान यूजीसी ने किया है। इसके अतिरिक्त वह शोध निर्देशक तीन वर्ष तक किसी भी शोधार्थी का रिसर्च गाइड नहीं बन पायेगा। यूजीसी ने यह निर्णय शोध कार्य में नवीन अवधारणाओं के समावेश हेतु किया है। इसके लिए प्रत्येक शोध संस्थान को प्लेजियारिज्म डिसीप्लीनरी अथाॅरिटी (पीडीए) का गठन करना होगा। यह अथाॅरिटी शोध कार्य के मुख्य बिन्दुओं सारांश संक्षेपिका हाइपोथीसिस, अवलोकन, शोध परिणाम एवं शोध निष्कर्ष सुझावों आदि में नकल की सूक्ष्मता से जांच करेगी। नकल का पता लगाने यूजीसी से अनुमोदित साफ्टवेयर भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त शोध संस्थानों में एकैडेमिक मिस्कंडक्ट पैनल (एएमपी) का गठन भी अनिवार्य किया जा रहा है। यदि किसी उधार थी के विरूद्ध पीएचडी थीसिस नकल की शिकायत विश्वविद्यालय  अथवा शोध संस्थान को लिखित रूप से प्राप्त होगी। तो सर्वप्रथम उसका प्रारंभिक तौर पर परीक्षण एएमपी कमेटी करेगी तथा यह कमेटी अपनी रिपोर्ट पीडीए कमेटी को सौंपेगी। प्रत्येक शोधार्थी को अपनी पीएचडी थीसिस जमा करते समय उसकी मौलिकता का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है।