सीजी न्यूज ऑनलाइन 13 जुलाई। ED raid big news : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL पोंजी स्कैम में तगड़ा एक्शन लेते हुए 762 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं. यह कार्रवाई मुख्य आरोपी निर्मल सिंह भंगू और उसके करीबियों के खिलाफ हुई है. ED की अब तक की कुल जब्ती 1,262 करोड़ रुपये को पार कर चुकी है.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (PACL) पोंजी घोटाले के मामले में 762.47 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति जब्त की है. ED की ओर से दी गई जानकारी के अनुसरा, इस मामले में अब तक जब्त की गई संपत्तियों का कुल कीमत लगभग 1,262 करोड़ रुपये हो गया है. जब्त की गई संपत्तियां PACL के डायरेक्टर, प्रोमोटर और संबंधित लोगों की हैं, जो पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र और ऑस्ट्रेलिया में स्थित हैं.
इनमें से कई संपत्तियां इस 50,000 करोड़ रुपये के चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी निर्मल सिंह भंगू से जुड़ी हैं. ED ने पहले भी इस मामले में करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी.
भंगू के दामाद के खिलाफ चार्जशीट
ED ने दिल्ली की एक विशेष अदालत में कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इसमें जिसमें भंगू के दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हेयर भी शामिल हैं. ED का दावा है कि हेयर ने PACL के जरिए निवेशकों से जुटाए गए धन को गलत तरीके से इस्तेमाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
हेयर ने कथित तौर पर PACL के फंड को अपनी कंपनी एम/एस एमडीबी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड में डायवर्ट किया और इस पैसे का इस्तेमाल मुंबई, पंजाब और हरियाणा में संपत्तियां खरीदने में किया. इसके अलावा, हेयर ने पर्ल्स ऑस्ट्रेलिया प्राइवेट लिमिटेड और ऑस्ट्रेलिया मिराज I जैसी कंपनियों के जरिए 657 करोड़ रुपये विदेश भेजे.
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 18 फरवरी, 2024 को इस मामले में एक FIR दर्ज किया था. इसमें PACL के सीनियर अधिकारियों और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के नाम शामिल थे. ED और CBI की जांच में घोटाले से जुड़ी बड़ी मात्रा में रियल एस्टेट संपत्तियों का पता चला है.
केवल दिल्ली में ही 553 एकड़ में फैली 66 संपत्तियों की पहचान की गई हैं, जिनमें गोपालदास भवन (44), स्टेट्समैन बिल्डिंग (5), अंतरिक्ष भवन (6), और इंद्रप्रकाश बिल्डिंग (11) शामिल हैं. जांच एजेंसियां तमिलनाडु, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में फैली संपत्तियों का पता लगाने में जुटी हैं. जांच अभी भी जारी है.

