सोया चिक्की खाने के बाद शासकीय प्राथमिक शाला कोलिहापुरी के 29 बच्चे हुए बीमार, जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती,

दुर्ग 9 दिसंबर । शासकीय प्राथमिक शाला कोलिहापुरी विकासखंड दुर्ग जिला दुर्ग में आज सुबह सोया चिट्ठी खाने के बाद 29 बच्चे की तबीयत खराब हो गई । पेट में दर्द होने की शिकायत पर से इलाज के लिए उन्हें जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहां पर 20 से ज्यादा बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई । चार पांच बच्चों का उपचार अस्पताल में जारी है।

शासकीय प्राथमिक शाला कोलिहापुरी में आज सोया चिक्की खाने के बाद बच्चों की तबीयत खराब होने की जानकारी लगते ही भारी संख्या में पालक वर्ग स्कूल पहुंच गया था जिसके कारण स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था ।

जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने बताया कि शासकीय प्राथमिक शाला कोलिहापुरी में आज तीसरी से पांचवी कक्षा तक के छात्र छात्राओं को रेडी टू इट के तहत सोया चिक्की का वितरण किया गया था। अधिक मात्रा में सोया चिक्की खाने के कारण 26 छात्राएं एवं तीन छात्र की तबीयत अचानक खराब हो गई। सभी अस्वस्थ छात्र छात्राओं के द्वारा पेट में दर्द होने की शिकायत की गई जिसके कारण शाला में उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा तत्काल समीप के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लिया पूरी ले जाया गया और 108 को भी सूचना दे दी गई सभी बच्चों को उचित उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के पश्चात शीघ्र ही 20 से ज्यादा बच्चों को छुट्टी दे दी गई अस्पताल में अभी 4 से 5 बच्चों का इलाज चल रहा है श्री बघेल ने इस संबंध में बताया कि जिन बच्चों ने ज्यादा मात्रा में इसका सेवन किया था उन्हीं बच्चों के द्वारा पेट में दर्द होने की शिकायत की गई है।

सैंपल एकत्रित करेगा बीज निगम
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जो सोया चिट्टी का वितरण स्कूल में किया गया था उसके संबंध में बीज निगम को भी शिकायत की गई है इस पर से बीज निगम के द्वारा स्कूल में वितरित किए गए सोया चिक्की के सैंपल एकत्रित करने की बात कही गई है इन सैंपल को जांच के लिए टेस्टिंग लैब में भेजा जाएगा ताकि स्पष्ट हो सकेगी सोया चिक्की खाने के बाद ऐसी स्थिति किन कारणवश निर्मित हुई थी।

बच्चों का बीमार होना शिक्षकों की लापरवाही का दुष्परिणाम
शासकीय माध्यमिक शाला कोलिहापुरी के प्रधानाचार्य राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक रामकुमार वर्मा ने बताया कि कोरिया पूरी प्राथमिक शाला में जो आज बच्चों का स्वास्थ्य खराब हुआ है। उसके पीछे साला में कार्यरत शिक्षकों की घोर लापरवाही का ही परिणाम है। शिक्षकों के द्वारा छोटे-छोटे बच्चे को संभालने के अति संवेदनशील मामलों में घोर लापरवाही की जाती रही है। उच्च अधिकारियों को शिकायत करने के बाद एवं शिक्षकों को समझाइश देने के बाद भी कोई स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। आज भी निश्चित मात्रा में ही बच्चों को सोया चिक्की दिया जाना था और लगातार हिदायत दी गई थी कि खाली पेट किसी भी बच्चे को सोया चिट्ठी नहीं देना है। इसके बावजूद इन नियमों का पालन किए बिना ही प्राथमिक शाला के शिक्षकों के द्वारा सोया चिट्टी का वितरण किया गया। एक की बजाय बच्चों के द्वारा दो से तीन सोया चिक्की का सेवन किया गया। उसी के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है।

