🛑 केरल-महाराष्ट्र और दिल्ली में सबसे ज्यादा असर
सीजी न्यूज ऑनलाइन 31 मई। देश में कोरोना वायरस डराने लगा है. कई महीनों की शांति के बाद संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है. कोविड केसों में पांच गुना उछाल आया है. कुल एक्टिव मामले 2,700 पार हो गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. विभाग का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है.
देश में कोरोनावायरस एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में कोविड-19 के एक्टिव केसों की संख्या 2,710 तक पहुंच गई है, जिसमें केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं. केरल में 1,147 केस रिपोर्ट किए गए. उसके बाद महाराष्ट्र में 424 केस दर्ज किए गए.
30 मई की सुबह 8 बजे तक के आंकड़े के मुताबिक, दिल्ली में 294 और गुजरात में 223 मरीज मिल चुके हैं. कर्नाटक और तमिलनाडु में 148-148 केस दर्ज किए गए हैं. जबकि पश्चिम बंगाल में 116 मामले दर्ज किए गए हैं. पिछले 24 घंटे में 7 मौतें भी दर्ज की गई हैं. इस साल के पहले पांच महीनों में मरने वालों की संख्या 22 हो गई है. पिछले 24 घंटे में महाराष्ट्र में दो मौतें हुई हैं. जबकि दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब और तमिलनाडु में एक-एक मौत रिकॉर्ड की गई है.
दिल्ली में 60 वर्षीय महिला की मौत हुई है. राष्ट्रीय राजधानी में 24 घंटे में 77 मरीज मिले हैं. उसके बाद केरल में 24 घंटे में 72 और महाराष्ट्र में 34 मरीज पाए गए.
बीते सप्ताह (25 मई तक) कोविड केसों में पांच गुना उछाल देखने को मिला था और आंकड़ा 1,000 पार कर गया था. केरल में सबसे ज्यादा कोरोना टेस्ट किए गए हैं. संभवत: इससे वहां मरीज भी सबसे ज्यादा ट्रेस हुए हैं. मिजोरम में भी कोरोना के दो केस सामने आए हैं. यहां सात महीने बाद कोरोना के मरीज मिले.
उछाल के पीछे क्या वजह?
माना जा रहा है कि ओमिक्रॉन के दो नए सब-वेरिएंट – LF.7 और NB.1.8.1 ने टेंशन बढ़ाई है. कोरोना केसों में अचानक हुई इस वृद्धि के लिए इन्हीं दो वेरिएंट को जिम्मेदार बताया जा रहा है. हालांकि JN.1 अभी भी प्रमुख वेरिएंट बना हुआ है. अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने LF.7 या NB.1.8.1 को चिंताजनक वेरिएंट के रूप में क्लासिफाइड नहीं किया है.
हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोरोना के अधिकांश मामले हल्के हैं और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. एक्सपर्ट ने सुझाव दिया है कि नए वेरिएंट में कुछ हद तक प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता हो सकती है, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वे लंबे समय तक गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं. इसके लक्षण काफी हद तक सामान्य फ्लू जैसे ही हैं. कुछ लक्षणों में बुखार, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द और थकावट शामिल हैं.
कई राज्यों ने अस्पतालों को बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, टेस्टिंग किट और वैक्सीन की उपलब्धता बनाए रखने का निर्देश दिया है. बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाते समय मास्क पहनने की सलाह दी गई है.
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
पुणे स्थित एक अस्पताल में क्रिटिकल केयर के डॉक्टर उपेंद्र सिंह कहते हैं, देश में फैल रहे ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स में कुछ अतिरिक्त म्यूटेशन देखे गए हैं, जो इसे शरीर में बनी प्रतिरक्षा को चकमा देकर आसानी से संक्रमित करने के योग्य बनाते हैं।
जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है उनमें इस संक्रमण का असर नहीं हो रहा है, पर चिंताजनक बात ये है कि संक्रमित व्यक्ति वायरस का वाहक जरूर हो सकता है, जिससे उन लोगों मे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है जो पहले से बीमार हैं या बुजुर्ग हैं। ऐसे लोगों में गंभीर रोग विकसित हो सकता है। इसलिए जरूरी कि सभी लोग संक्रमण से बचने के उपाय करते रहें।
आप जाने-अनजाने ऐसे लोगों में वायरस पहुंचा सकते हैं जिनमें गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक रहता है।
क्या सावधानियां बरतनी जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि कोरोना कई राज्यों में बढ़ रहा है और इसका खतरा भीड़भाड़ वाली जगहों में ज्यादा होता है इसलिए ऐसे स्थानों पर जानें से बचें।
मास्क लगाना, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
अगर आपके घर में कोई बुजुर्ग या गर्भवती है तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। उनसे मिलने से पहले हाइजीन का विशेष ध्यान रखें, विशेषतौर पर कहीं बाहर से आने के बाद।
कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर, कोरोना को हराने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।
65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए बूस्टर डोज के लिए अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
राज्यवार केस विवरण (अब तक)
केरल- 1,147 केस
महाराष्ट्र- 424 केस
दिल्ली- 294 केस
गुजरात- 223 केस
कर्नाटक-तमिलनाडु: 148-148 केस
पश्चिम बंगाल- 116 केस
राजस्थान- 51 केस
यूपी- 42 केस
पुडुचेरी- 35 केस

