*अमेरिका से बारह साल बाद भारत लौट भाई-बहन ने चुकाया सत्तैया की मूंगफली का कर्ज, परिवार को दिये 25 हजार*

*अमेरिका से बारह साल बाद भारत लौट भाई-बहन ने चुकाया सत्तैया की मूंगफली का कर्ज, परिवार को दिये 25 हजार*


अमेरिका से बारह साल बाद भारत लौट भाई-बहन ने चुकाया सत्तैया की मूंगफली का कर्ज, परिवार को दिये 25 हजार

नई दिल्ली, 5 जनवरी। बारह साल पहले जिस मूंगफली वाले ने अमेरिका के भाई-बहन को फ्री में मूंगफली दी थी, उस मूंगफली का कर्ज 12 साल बाद दोनों भाई-बहन ने गरीब परिवार वाले को ढूंढ कर अपना कर्ज चुकाया है।मामला 2010 का है, जब नेमानी प्रणव और उनकी बहन सुचिता आंध्र प्रदेश में एक ठेले वाले के पास मूंगफली लेने गए थे। दोनों भाई-बहन अपने पिता मोहन के साथ आंध्र प्रदेश के यूकोथापल्ली समुद्र किनारे घूमने गए थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि उनकी जेब में पैसे नहीं है और वह अपना पर्स घर पर भूल आए हैं।मूंगफली लेने के बाद उन्होंने यह बात सत्तैया नाम के ठेलेवाले से बताई तो ठेलेवाले ने भाई-बहन को फ्री में मूंगफली दे दी। ठेलेवाले ने उनसे पैसे नहीं मांगे। इसके बाद दोनों भाई-बहन अपने पिता के साथ मूंगफली लेकर चले गए। मोहन ने ठेलेवाले से वायदा किया था कि जल्द ही वह उसका उधार चुका देंगे। इस दौरान भाई-बहन ने सत्तैया ठेलेवाले की एक तस्वीर भी खींच ली थी हालांकि वह जल्दी उधार चुका नहीं सके, क्योंकि वो एनआरआई थे और उन्हें कुछ दिनों बाद अमेरिका लौटना पड़ा। भले ही वह अमेरिका चले गए लेकिन उन्हें यह बात याद रही कि सत्तैया ठेलेवाले के पैसे चुकाने हैं। जब 11 साल बाद दोनों भाई-बहन दोबारा भारत आए तो उन्होंने सत्तैया ठेलेवाले के पैसे चुकाने के लिए उसे ढूंढना शुरू किया। दोनों ने काफी खोजबीन की लेकिन सत्तैया का कुछ पता नहीं चल सका। उनके पिता भी मूंगफली बेचने वाले सत्तैया के पैसे चुकाने के लिए काफी उत्सुक थे। सबने मिलकर सत्तैया को खूब ढूंढा, लेकिन उसका कुछ पता न चल सका। इसके बाद उन्होंने काकीनाडा के विधायक चंद्रशेखर रेड्डी से सत्तैया का पता लगाने के लिए मदद मांगी। विधायक ने सत्तैया की तलाश में फेसबुक पर एक पोस्ट डाली। इसके बाद सत्तैया के पैतृक गांव नागुलापल्ली के कुछ लोगों ने बताया कि सत्तैया इस दुनिया में नहीं है और उनकी मौत हो चुकी है। ऐसे में नेमानी प्रणव और सुचिता सत्तैया के परिवार वालों से मिलने उनके गांव पहुंचे और उन्हें 25 हजार रुपये की राशि दे मूंगफली का कर्ज चुकाया।