*कामधेनु विश्वविद्यालय में विश्व विद्यालय की रैंकिंग सुधार एवं ई-संसाधनों के अधिकाधिक उपयोग विषय पर कार्यशाला का आयोजन*

*कामधेनु विश्वविद्यालय में विश्व विद्यालय की रैंकिंग सुधार एवं ई-संसाधनों के अधिकाधिक उपयोग विषय पर कार्यशाला का आयोजन*


कामधेनु विश्वविद्यालय में विश्व विद्यालय की रैंकिंग सुधार एवं ई-संसाधनों के अधिकाधिक उपयोग विषय पर कार्यशाला का आयोजन

दुर्ग 7 जनवरी । दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के अंतर्गत पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा में कुलपति डॉ. एन.पी. दक्षिणकर के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के अंतर्गत आने वाले विश्वविद्यालयों की रैंकिंग जिसमें राज्य एवं केंद्रीय कृषि, उद्यानिकी, माति्स्यकी, पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय आते है।देश स्तर पर विश्वविद्यालय की रैंकिंग में सुधार कैसे किया जाए तथा कृषि एवं उससे संबंधित विषयों के ज्ञान को अद्यतन बनाए रखने में ई-संसाधनों की उपयोगिता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शासकीय कोविड-19 नियमों का पूर्णत: पालन करते हुए किया गया। इस अतिथि व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक अनुसंधान एवं विस्तार संबंधित गतिविधियों में गुणात्मक सुधार लाना था, जिससे विश्वविद्यालय की रैंकिंग में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के मापदंडों के अनुरूप सुधार हो सके।

इस कार्यशाला में अतिथि विद्वान डाँ. के. विरांजेनेलू पुस्तकालयाध्यक्ष एवं विभाग प्रमुख केंद्रीय पुस्तकालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, वारंगल पूर्व विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्राध्यापक, प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने अपने सारगर्भित एवं पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आर.के. सोनवाने, वित्त अधिकारी श्री शशिकांत काले, अधिष्ठाता डॉ.एस.के. तिवारी, डॉ.जी. के. दत्ता, निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ.ओ.पी.मिश्रा, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.आर.पी. तिवारी,वन्य प्राणी एवं फॉरेंसिक मेडिसिन केंद्र के निदेशक डॉ.एस.एल.अली., जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के निदेशक डॉ.आर.सी.घोष, विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी एवं पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. दिलीप चौधरी, विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापकगण, स्नातकोत्तर तथा पी.एच.डी. अध्ययनरत् शोधार्थी की गरिमामय उपस्थिति में व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर मां सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं पूजा कर किया गया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ.एस. के. तिवारी द्वारा अतिथियों का स्वागत सत्कार उपरांत अतिथि विद्वान का संक्षिप्त परिचय देते हुए महाविद्यालय में उपलब्ध संसाधनों तथा शैक्षणिक अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ सुधीर उपरीत द्वारा विश्वविद्यालय में छात्रों एवं कर्मचारियों के कल्याण हेतु किए जा रहे कार्यो पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें भविष्य की योजनाएं बनाकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर कुलपति डॉ.एन.पी.दक्षिणकर ने सभागार में उपस्थित प्रध्यापकगणों एवं शोधार्थियों को नववर्ष की शुभकामनाएं तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि गुणवत्ता युक्त अनुसंधान कार्य करें जिसका लाभ किसानों तथा पशु पालकों को मिले  एवं गुणवत्तायुक्त शोधपत्र प्रकाशित करें तथा वैज्ञानिक शोध परियोजनाएं लाकर विश्वविद्यालय की रैंकिंग में सुधार में अपना योगदान दें। अतिथि विद्वान डॉ.के. वीरांजेनेलू ने अपना व्याख्यान पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध उत्पादकता की महत्ता एवं सुधार पर विस्तार से बताया कि विश्वविद्यालय की देश स्तर पर रैंकिंग में सुधार कैसे किया जा सकता है। कोरोना महामारी के इस युग में प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों को अपने ज्ञान को  अद्यतन बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय पुस्तकालय में उपलब्ध ई-संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग कैसे किया जाए इस हेतु बिंदुवार जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ.मीनू दुबे एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ.सुधीर उपरीत द्वारा किया गया।