सीजी न्यूज ऑनलाइन 06 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मंगलवार को यात्री बसों में बिना लाइसेंस कंडक्टर के संचालन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है, जबकि याचिकाकर्ता को जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है।
एक जनहित याचिका विनेश चोपड़ा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दायर की है। इसमें उन्होंने यात्री बसों (स्टेज कैरिज) में बिना लाइसेंस कंडक्टर के संचालन का मुद्दा उठाते हुए सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
याचिका में यह दलील दी गई है कि छत्तीसगढ़ में सड़क पर चलने वाली हर पंजीकृत यात्री बस या स्टेज कैरिज में लाइसेंसधारी कंडक्टर की उपस्थिति अनिवार्य है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत लाइसेंसधारी कंडक्टर की भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत बिना लाइसेंसधारी व्यक्ति कंडक्टर की भूमिका नहीं निभा सकता। लेकिन राज्य में यात्री बसों में बड़ी संख्या में बिना लाइसेंस कंडक्टरों द्वारा संचालन किया जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो रहा है।
याचिका में परिवहन विभाग के उड़नदस्तों और जांच चौकियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि कोई भी स्टेज कैरिज बस बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के संचालित न हो। साथ ही, यह भी सत्यापित करने की व्यवस्था करने की मांग की गई है कि बस में कंडक्टर की भूमिका वास्तव में लाइसेंसधारी व्यक्ति ही निभा रहा है या नहीं।
कोर्ट ने इस याचिका को गंभीर मानते हुए राज्य शासन को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद, याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में प्रत्युत्तर देने का अवसर मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

