बलौदा बाजार हिंसा मामले में MLA देवेंद्र की जमानत याचिका खारिज

बलौदा बाजार हिंसा मामले में MLA देवेंद्र की जमानत याचिका खारिज


सीजी न्यूज ऑनलाइन 03 जनवरी 2025। बलौदाबाजार हिंसा मामले में भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव को बड़ा झटका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से लगा है। कोर्ट ने देवेंद्र की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। पिछले दिनों जेल में बंद देवेंद्र यादव ने मामले में जमानत के लिए अपने वकील के जरिये कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसपर सुनवाई के बाद जस्टिस एनके व्यास ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने अब मामले में अपना फैसला जारी कर दिया है।

17 दिसंबर को हाई कोर्ट ने फैसला रखा था सुरक्षित

बता दें कि, बलौदाबाजार हिंसा मामले में जेल में बंद विधायक देवेंद्र यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद 17 दिसंबर को हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कहा कि हिंसा के दौरान देवेंद्र यादव मौजूद नहीं थे। शासन ने कहा- भाषण देकर आंदोलनकारियों को विधायक ने भड़काने का काम किया है। सुनवाई के दौरान विधायक के वकील ने कहा कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है।

राज्य शासन की तरफ से विधायक देवेंद्र यादव पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एनके व्यास ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बड़ौदा बाजार पुलिस ने 17 अगस्त को भिलाई से किया था गिरफ्तार

गौरतलब है कि, पुलिस ने बलौदाबाजार हिंसा के मामले में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को आरोपी बनाया है। इस मामले में पुलिस ने 4 बार नोटिस जारी किया, लेकिन विधायक ने बयान देने जाने से मना कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें भिलाई स्थित निवास से 17 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल में बंद विधायक देवेंद्र यादव की जमानत निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उनके वकील ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। इधर, केस में देवेंद्र यादव और ओमप्रकाश बंजारे के खिलाफ पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में 449 पेज का चालान पेश किया है। आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसक प्रदर्शन मामले में आरोपी बनाया है।

सरकारी वकील ने क्या कहा कोर्ट में ?

उपमहाधिवक्ता नीरज शर्मा ने कोर्ट में देवेंद्र यादव की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सुनवाई के दौरान कहा कि, आरोपी व्यक्ति ने आपराधिक साजिश को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है और दंगा करने, आपराधिक बल का इस्तेमाल करने, सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के लिए उन पर हमला करने, सार्वजनिक मार्ग में बाधा डालने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, इमारतों, वाहनों में आग लगाने और पुलिस अधिकारियों पर हमला करने का अपराध किया है। उन्होंने आगे कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद सह-आरोपी व्यक्ति पंकज मरैया उर्फ गोल्डी मरैया जो वार्ड क्रमांक 16 का वार्ड सदस्य और जिला कांग्रेस पार्टी का उपाध्यक्ष है, का बयान दर्ज किया गया है जिसमें उसने कहा है कि किशोर नवरंग जो कि इस सभा का आयोजक है, को लोगों ने आश्वासन दिया था कि वे इस आंदोलन में उसका समर्थन करेंगे जिसमें वित्तीय सहायता भी शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने यह तथ्य आवेदक को
बताया तो उसने कहा कि आंदोलन इतना मजबूत होना चाहिए कि यह सरकार को हिला दे और यह भी कहा कि वह सभा में आएगा, अगर जरूरत पड़ी तो वह वित्तीय खर्च भी करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आवेदक ने 10.06.2024 को बलौदाबाजार आने की सूचना विवेक यदु और सूर्यकांत वर्मा को दी थी, तब वे शैलेंद्र बंजारे, सूर्यकांत वर्मा, विवेक यदु और अन्य स्वयंसेवकों के साथ अंबेडकर चौक पर आवेदक का स्वागत करने गए थे और स्वागत करने के बाद वे दशहरा मैदान गए थे, जहां सभा चल रही थी। उन्होंने यह भी बताया कि जब आवेदक ने मंच पर बैठने का प्रयास किया तो अन्य लोगों ने उसे रोक दिया और अनिच्छा जताते हुए वह मंच के पास बैठ गया और कहा कि सरकार को ज्ञापन देने से प्रशासन नहीं टूटेगा, बल्कि कुछ अलग किया जाएगा, तभी समाज की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान आवेदक पर हिंसा और आंदोलन में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संपत्ति और सार्वजनिक भवन को नुकसान पहुंचा है, जिसमें कलेक्ट्रेट भवन में 257 से अधिक वाहन जलाए गए हैं, जिनमें सरकारी अधिकारियों के वाहन, 3 अग्निशमन वाहन और आम जनता के कई वाहन भी शामिल हैं। यहां यह बताना उचित होगा कि पारिवारिक न्यायालय के एक न्यायिक अधिकारी के वाहन को भी जलाया गया है, जिसके लिए एक अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। अपराध की लिए एक अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए, जिसके परिणामस्वरूप पूरे राज्य में शांति और कानून का शासन नष्ट हुआ है, साथ ही दंगे भड़काने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में आवेदक की भूमिका को देखते हुए, उसकी जमानत याचिका को अस्वीकार किया जाना चाहिए।