भिलाई नगर 30 नवंबर । भिलाई श्रमिक सभा एचएमएस के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने कहा कि सेंट्रल लेबर कमिश्नर कार्यालय में 26 नवंबर को हुई कॉउंसिलेशन बैठक के दौरान सेंट्रल लेबर कमिश्नर द्वारा सेल प्रबंधन को निलंबित किए हुए कर्मचारी की कार्यवाही को गलत बताते हुए रिपोर्ट मांगी थी। जिसका जवाब सेल प्रबंधन ने दिया तथा इसकी प्रति सभी यूनियनों को दी गई। सेल प्रबंधन द्वारा 39 माह का एरियर्स पर असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अफ़ोर्टबीलिटी क्लाज़ लगाने के कारण एरियर्स देना संभव नहीं है, इसका जवाब देते हुए कामरेड एस डी त्यागी उपाध्यक्ष (एचएमएस) ने कहा कि यदि प्रबंधन को इसकी जानकारी थी तो MOU के समय क्यों नहीं बताया गया यह गलती प्रबंधन की है और अब प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि सरकार से अप्रूवल ले और कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान करें।
भिलाई श्रमिक सभा (एचएमएस) के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने ग्रेच्युटी सीलिंग, एडिशनल इंक्रीमेंट एच आर पर्क के 50% टैक्स को माफ करने तथा 9% पेंशन अंशदान 01-01-2007 से देने का मुद्दा उठाया, इस पर प्रबंधन ने जवाब देते हुए कहा कि यह MOU का हिस्सा नहीं है बीएमएस के प्रतिनिधि ने एक कर्मचारी के ट्रांसफर का मुद्दा उठाया जिसे कुछ ही दिनों पूर्व इलाज के लिए हैदराबाद रेफर किया गया था तथा उसकी मेडिकल फैसिलिटी रोक दी गई है आरएलसी के कहने पर तत्काल उसका मेडिकल फैसिलिटी को बहाल कर इलाज शुरू किया गया। पहले ड्राफ्ट यूनियनों द्वारा नकार देने के पश्चात दूसरे ड्राफ्ट में प्रबंधन ने एक्ट के अनुसार कर्मचारियों के प्रोटेक्शन हेतु ID एक्ट 1947 के सेक्शन 33-1-A को दर्शाते हुए कार्यवाही को गलत बताया एवं कहा कि इसकी सुनवाई अलग से की जाएगी। इसी बीच सीटू के प्रतिनिधि ने इस कॉउंसिलेशन बैठक को निरस्त कर FOC (फैलियर ऑफ कॉउंसिलेशन) का मुद्दा उठाया जिसे बाकी सभी यूनियनों ने नकार दिया क्योंकि जब मैनेजमेंट बैठक बुलाने को तैयार है और जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, FOC करने पर मामला कोर्ट में चला जाएगा। सीटू द्वारा इस प्रकार की बात करना दुर्भाग्य जनक है।
अंत में ड्राफ्ट में सीटू को छोड़ सभी यूनियनों ने हस्ताक्षर किया सीटू का कहना था कि अन्य मुद्दों को भी ड्राफ्ट में लिखा जाए जबकि आरएलसी का कहना था की सभी मुद्दों का उल्लेख 24 जनवरी की बैठक में किया जा चुका है इस पर सीटू ने साइन करने से इनकार किया। सीटू द्वारा साइन न किए जाने को ही मुद्दा बनाते हुए प्रबंधन ने भी हस्ताक्षर करने से मना कर दिया प्रमोद कुमार मिश्र का कहना है की बैठक में अधिकतर मुद्दों को हमने स्वयं उठाया है लेकिन हमने हस्ताक्षर किया है क्योंकि हम भलीभांति जानते हैं कि लेबर कमिश्नर की कुछ सीमाएं हैं वह हाथ पड़कर प्रबंधन से समझौता नहीं करा सकता बैठक में तो NJCS नेताओं को ही अपनी बात तर्क के साथ प्रबंधन से मनवानी है।
वर्तमान स्थिति चिंताजनक हो गई है जिन कर्मचारियों ने हड़ताल कर अपना एक दिन का वेतन कटवाया था वह पूछ रहे हैं कि आगे क्या होगा, जिन कर्मचारियों के ऊपर कार्रवाई हुई है उन्हें किस प्रकार प्रोटेक्ट किया जाएगा इसका जवाब किसी भी यूनियन के पास नहीं है। सीटू ने हस्ताक्षर नहीं कर प्रबंधन के हाथ में हथियार दे दिया है और कर्मचारियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

