सीजी न्यूज ऑनलाइन, 04 नवंबर । लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ की शुरुआत 5 नवंबर को नहाए-खाए के साथ होगी. चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व को बिहार, यूपी, झारखंड समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है. यह पर्व सांप्रदायिक सौहार्द को भी प्रदर्शित करता है.
छठ एक ऐसा महापर्व है, जिसमें उगते सूर्य के साथ-साथ डूबते सूर्य की भी पूजा की जाती है. व्रतियों के परिवारों के अलावा बाजार में भी इसकी चहल-पहल दिखने लगी है.

भगवान भुवन भास्कर और छठी मैया की उपासना का यह पारंपरिक पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है. दिवाली के बाद से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है.
भिलाई -दुर्ग सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ में छठ पूजा का त्योहार देशभर में खासकर बिहार, झारखंड उत्तरप्रदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। सबसे पहले नहाय खाय होता है। इस साल इस पर्व की शुरुआत मंगलवार 5 नवंबर से हो रही है।
कार्तिक छठ पूजा कैलेंडर 2024
• नहाय खाय – मंगलवार 05 नवंबर 2024
• खरना- बुधवार 06 नवंबर 2024
• शाम का अर्घ्य – गुरुवार 07 नवंबर
• सुबह का अर्घ्य – शुक्रवार 08 नवंबर
छठ महापर्व कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से नहाय खाय के साथ शुरू होता है और सप्तमी तिथि को उदयाकालीन अर्घ्य के साथ समाप्त होता है। यह पर्व सूर्यदेव को समर्पित है। मान्यता के अनुसार इस पर्व को विधि-विधान के साथ करने से व्रती की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं। छठ पूजा का त्योहार देशभर में खासकर बिहार, झारखंड , उत्तर प्रदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

किस दिन है नहाय खाय और खरना
छपरा बिहार की मूल निवासी सेक्टर 1 में निवासरत श्रीमती अनीता सिंह ने बताया कि
छठ पूजा का यह व्रत सबसे पहले नहाय-खाय से शुरू होता है। इस साल छठ पर्व मंगलवार 5 नवंबर से शुरू हो रहा है। पहले दिन 5 नवंबर को नहाय-खाय, 6 नवंबर को खरना, 7 नवंबर को अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य यानी मुख्य पूजा और मुख्य छठ पूजा के दिन 36 घंटे का निर्जला व्रत किया जाता है। इसके बाद 8 नवंबर को चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस व्रत का समापन करते समय व्रती कच्चा दूध और प्रसाद ग्रहण करते हैं।

छठ पूजा सामग्री लिस्ट
- पीतल का पात्र
- फल
- सुपारी
- चावल
- सिंदूर
- फूल
- एक थाली
- पान
- गाय का घी
- शहद
- धूप
- शकरकंदी
- सुथनी
- बड़ा वाला नींबू
- पानी वाला नारियल
- मिठाईयां
- गुड़
- अरवा का चाल
- गंगा जल
- बांस की दो बड़ी टोकरियां
- पीतल का एक लोटा
- ठेकुआ का भोग
- गेहूं, चावल का आटा
- साधक के लिए नए कपड़े
- 5 पत्तियां लगे हुए गन्ने
- बांस की दो बड़ी टोकरियां
- मूली, अदरक और हल्दी का हरा पौधा
व्रत में क्या करें
सेक्टर 2 निवासी बिहार क्या वैशाली नगर जिले की मूल निवासी श्रीमती माधुरी सिंह ने बताया कि इस दिन सूर्य उदय से पहले उठ जाएं और संकल्प लें, हम इस व्रत को करेंगे। आपको बता दें कि व्रत का संकल्प लेना बहुत जरूरी है, जिसमें कहा जाता है कि हम छठ व्रत शुरू कर रहे हैं और हमारी मनोकामना (जो भी हो मन में बोलें) पूर्ण करना। इस दिन व्रती महिलाएं स्नान-ध्यान कर नित पूजा पाठ के बाद कद्दूभात समेत विविध व्यंजन बनाती हैं। कद्दू की सब्जी का बनाने की प्रथा बहुत पुरानी है। ये व्यंजन खास तौर पर देसी घी में बनाए जाते हैं। उन्हें खाकर व्रत शुरू होता। बुधवार को खरना है जिसमें खीर बनाई जाएगी। गुरुवार को अस्ताचलगामी सूर्य भगवान को पहला अर्घ्य और शुक्रवार को उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
सूर्य भगवान का अर्घ्य है जरूरी
इस दिन सूर्य भगवान को अर्घ्य देना बहुत जरूरी है। इस चिप पर अगर आप व्रत भी नहीं कर रहे हैं, तो भी आपको सूर्य को पढ़ें दे सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे कुंडली में सूर्य ग्रह से जुड़े दोष समाप्त होते हैं।

