भिलाई नगर 30 सितंबर । बिना किसी योजना के बायोमेट्रिक फेस रीडिंग अटेंडेंस सिस्टम लागू करने के बाद कर्मचारियों के समक्ष आ रही परेशानियों के कारन आज हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन सीटू का प्रतिनिधिमंडल महाप्रबंधक (एच आर वर्क्स) से मिला। पांच अगस्त से लागू इस व्यवस्था के कारण उत्पन्न समस्याओं के निराकरण के सम्बन्ध में चर्चा किए।

भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन को हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) द्वारा 05 अगस्त 2024 को बायोमेट्रिक आधारित उपस्थिति दर्ज करने वाली व्यवस्था से संयंत्र कर्मियों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया गया था, परंतु प्रबंधन द्वारा कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया। अभी भी स्थितियां जस की तस है जैसे :-
- गेटो में जाम की स्थिति में कोई सुधार नहीं देखा जा रहा है जिससे ध्वनि और वातावरण प्रदूषण में वृद्धि हो रही है।
- सड़क दुघर्टनाओं को रोकने हेतु लोको मूवमेंट को ड्यूटी बदलने के दौरान स्थगित रखा जाए अर्थात प्रथम पाली में 5:45 बजे से 6:15 बजे तक, सामान्य पाली में 8:45 बजे से 9:15 बजे तक, द्वितीय पाली में 1:45 बजे से 2:15 बजे तक, रात्रि पानी में 9:45 बजे से 10:15 बजे तक लोको मूवमेंट पर रोक लगाई जाए क्योंकि सभी को समय पर फेस रीडिंग की जल्दबाजी होती है।
- बोरिया गेट एवं मेंन गेट पर सड़कों पर भारी वाहन दो – दो कतार में खड़े रहते हैं जिससे ड्यूटी जाने के समय कार निकालना मुश्किल हो जाता है। वहीं 27 सितंबर 2024 को डिप्टी डायरेक्टर का दौरा होने के चलते मुर्गा चौक से जय स्तंभ चौक और बोरिया गेट के पहले भारी वाहनों को पूरा हटा दिया गया था। इससे यह स्पष्ट है कि प्रबंधन यदि इच्छा शक्ति दिखाए तो सड़क व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
- मेन गेट पर संयंत्र में प्रवेश के लिए सिर्फ चार गेट उपलब्ध है जिसमें सिर्फ एक गेट बीएसपी कर्मियों को अंदर जाने के लिए मिलता है बाकी गेटों से ठेका कर्मियों को अंदर जाने के लिए मिलता है जबकि निकलने के लिए 10 गेट उपलब्ध होते हैं। इसमें से दो गेटो को बाहर व्हीकल खड़े करने वाले कर्मियों को अंदर जाने के लिए दिया जाना था। परंतु अभी तक कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया है वहीं मेन गेट में CISF द्वारा प्रवेश के गेटों को ऑफिस में तब्दील किया गया है। प्रबंधन ने CISF से गेटों को वापस नहीं लिया बल्कि CISF ने गेटों को कब्ज़ा कर बनाए आफिस में कम्प्यूटर और केबल आदि लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रबंधन यूनियनों द्वारा उठाए गए विषयों को गम्भीरता से नहीं लेता है।

