कर्मियों को नुकसान पहुंचा कर भी कर रहें वाहवाही, इंटक की बयानबाजी पर सीटू का दो टूक जवाब
भिलाई नगर 20 फरवरी । पिछले दिनों वेतन वार्ता बैठक में एक तरफ इंटक ने एमओयू पर दस्तखत में अहम भूमिका अदा की वहीं दूसरी तरफ आधे अधूरे एवं कर्मी विरोधी प्रावधानों वाले एम ओ यू के खिलाफ कर्मियों के बीच से आ रहे विरोध एवं गुस्से का सामना करने से बचने के लिए कर्मियों को गुमराह कर रहा है इस विषय पर पिछले दिनों वेतन समझौता के एमओयू पर सीटू द्वारा दस्तखत ना करने को लेकर इंटक के नेताओं द्वारा अखबारों एवं सोशल मीडिया में किए गए बयान बाजी पर दो टूक जवाब देते हुए सीटू के सहायक महासचिव टी जोगाराव ने कहा कि वेतन समझौता की बैठक में यूनियनों के द्वारा संयुक्त रुप से तय किए गए प्रस्ताव को अतिक्रमण करते हुए बिना सोचे समझे एमओयू में दस्तखत करने का ही परिणाम है कि प्रबंधन समझौते का बहाना लेकर निरंकुश तरीके से पहले से प्राप्त अधिकारों को भी कटौती करने की दिशा में सर्कुलर जारी कर रहा है जिसके विपरीत परिणामों को कर्मचारी भुगत रहे हैं
8% दासा पर दस्तखत क्यों किए – जवाब दो
दासा के संदर्भ में भिलाई स्तर पर कुछ तथाकथित यूनियनों द्वारा 8% पर दस्तखत करने को आड़े हाथों लेते हुए सीटू नेता जोगाराव ने कहा की “चलिए हम आपकी बात मान लेते हैं कि आप प्रबंधनकी गलत नीतियों का विरोध कर रहे हैं तो ऐसे में आप ये बता दें कि 6 जनवरी को राजहरा में जब दासा में 2% कम करके साइन किया गया था तो उस समय तक अधिकारियों को पर्क्स का ऐरियस मिल चुका था किंतु कर्मियों को पर्क्स का एरियर नहीं मिला एवं कर्मचारियों की ग्रेजुएटी भी सीलिंग करने का आदेश जारी कर दिया तो प्रबंधन के इस रवैया का विरोध करने के बजाए आप लोगों ने दासा पर 2% कम पर साइन क्यों किया ।
इंटक दूसरे यूनियनों पर तंज कसना और जुमलेबाजी करना बंद करें – सीटू
सीटू के सहायक महासचिव एस एस के पनीकर ने कहा कि पिछले मान्यता चुनाव के पूर्व इंटक ने कर्मियों के लिए पे पॉकेट बढ़ाने, कर्मियों के लिए स्वास्थ्य , शिक्षा एवं आवास सुविधा बेहतर करने का वादा किया था, किंतु मान्यता प्राप्त करने के बाद पूरे मान्यता काल के दौरान इन विषयों पर आश्चर्यजनक रूप से ना केवल चुप्पी साध कर रखा अपितु पे पॉकेट बढ़ाने के संदर्भ में इनका व्यवहार संयंत्र कर्मियों को आश्चर्यचकित एवं अचंभित भी किया | पुनः मान्यता चुनाव की सुगबुगाहट ने इंटक यूनियन के पदाधिकारियों को कुंभकरण की नींद से जगा दिया है, इसलिए अब इंटक ने ईमानदार और जिम्मेदार यूनियन पर तंज कसना और अपने जुमलो का पिटारा खोल कर संयंत्र कर्मियों को गुमराह करने का प्रयास प्रारंभ कर रहा है।
गलती करने पर उसे स्वीकार भी करना चाहिए
यूनियन कर्मचारियों का होता है और उन्हें अपने कर्मचारियों के हित में समझौते करने चाहिए न कि प्रबंधन के हित का ध्यान रखकर | किन्तु बहुत ही अफसोस की बात है कि एनजेसीएस में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व रखने वाली यूनियन ने प्रबंधन के साथ मिलकर बहुमत के आधार पर साइन किया, यूनियनों की आपसी एकता को तोड़ा एवं अब बाहर आकर दूसरे यूनियनों पर ठीकरा फोड़ने का प्रयास करता है जिसका खामियाजा कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ रहा है । सीटू का यह मानना है कि जाने अनजाने में गलती करने पर उसे स्वीकार भी करना चाहिए, इसमें बड़प्पन ही दिखता है |
अब भी सयुंक्त संघर्ष करके हासिल कर सकते है अपनी मांगे
सीटू नेता अशोक खातरकर ने कहा कि सभी यूनियनों के काम करने के अपने अपने तरीके होते है वे अपने तरीके से काम करने के लिए स्वतन्त्र है, किन्तु अपने यूनियन के काम करने के दौरान अपनी गलतियों को छुपाने या अपने आप को ऊँचा दिखाने के लिए दूसरे यूनियनों पर तंज कसने या टिका-टिप्पणी करने की कोशिश से बचना चाहिए, क्योंकि यूनियनों पर नाराज होने, तंज कसने या टिका-टिप्पणी करने के लिए कर्मी सक्षम है एवं वे सब कुछ देखते व समझते है | इसके बावजूद यदि कोई भी यूनियन सीटू के साथ ऐसी हरकत करता है तो सीटू इसका उत्तर देना अच्छी तरह से जानता है | इसीलिये सीटू सभी यूनियनों से पुनः आग्रह करता है की “जो हो गया वो हो गया” हम अब भी सयुंक्त संघर्ष करके कर्मियों के पक्ष में अपनी मांगों को हासिल कर सकते है |

