पुरानी भिलाई अपहरण मामले में आरोपी नजरुल को राहत, 9 सितंबर तक पुलिस रिमांड का आवेदन खारिज, जांच अधिकारी की प्रक्रिया गलत, आईजी दुर्ग रेंज को उचित कार्रवाई करने दिया आदेश

पुरानी भिलाई अपहरण मामले में आरोपी नजरुल को राहत, 9 सितंबर तक पुलिस रिमांड का आवेदन खारिज, जांच अधिकारी की प्रक्रिया गलत, आईजी दुर्ग रेंज को उचित कार्रवाई करने दिया आदेश


भिलाई नगर 29 अगस्त । जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट भिलाई 3 द्वारा पुरानी भिलाई थाने में दर्ज अपहरण के मामले में गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद नजरुल 9 सितंबर तक पुलिस रिमांड के आवेदन को अस्वीकृत कर दिया गया है। जांच अधिकारी की पूरी प्रक्रिया को गलत बताते हुए जांच अधिकारी के विरुद्ध पुलिस महानिरीक्षक को उचित कार्यवाही हेतु निर्देश दिए गए हैं।
न्यायालय ने यह भी पाया है कि अपराध भी गलत धाराओं में पंजीबद्ध किया गया है।

आपको बता दें कि 26 अगस्त को नगर निगम भिलाई चरोदा के सभापति कृष्ण चंद्राकर, पार्षद अभिषेक वर्मा पार्षद टी रमना राव, पप्पू चंद्राकर एवं मोहम्मद नजरुल इस्लाम के मिला एफ अमित लखवानी का अपहरण कर मारपीट करने के मामले में अपराध दर्ज किया गया था। घटना कार्य करने के पश्चात सभी आरोपी फरार हो गए थे परंतु आरोपी मोहम्मद नजरुल इस्लाम को पुलिस द्वारा गोंदिया से 28 अगस्त को गिरफ्तार कर कल शाम को न्यायाधीश प्रथम श्रेणी जिला न्यायालय दुर्ग में पेश किया गया था।

आरोपी मोहम्मद नजरुल इस्लाम के अधिवक्ता बीजू सरकार ने बताया कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जांच अधिकारी योगेश कुमार वर्मा के द्वारा के द्वारा गलत धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया और उसके उपरांत सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध में अभियुक्त गिरफ्तारी क्यों आवश्यक है, इसका संतोष जनक विधिक कारण प्रस्तुत करने में विफल रहे।

इतना ही नहीं, मामले के जांच अधिकारी द्वारा अधूरी केस डायरी न्यायालय में प्रस्तुत की गई है। पुलिस कथन पर साक्षियों का छायाचित्र चस्पा नहीं किया गया है। गिरफ्तारी पत्रक में अभियुक्त का छायाचित्र चस्पा नहीं किया गया है। अभियुक्त का मुलाहिजा कराये बिना न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। केस डायरी में मुलाहिजा प्रतिवेदन फार्म कोरा संलग्न किया गया है। चिकित्सकीय परीक्षा की रिपोर्ट की एक प्रति गिरफ्तार किए गए व्यक्ति अथवा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति द्वारा नाम निर्दिष्ट व्यक्ति को दी जायेगी । जिसका पालन अनुसंधान अधिकारी के द्वारा नहीं किया गया है और अभियुक्त को गिरफ्तार कर रिमांड हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है जो विधि के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

इस मामले में अनुसंधान अधिकारी के द्वारा सर्वोच न्यायालय द्वारा अर्नेश कुमार विरूद्ध बिहार राज्य एवं अन्य 02, के प्रकरण में दिए गए निर्देशों के साथ सत्येन्द्र कुमार अंटील विरुद्ध सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन एवं अन्य में प्रतिपादित सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है कि सात वर्ष तक के अपराध में अभियुक्त की गिरफ्तारी क्यों आवश्यक है और उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार प्रथम सूचना धारा 189 (2), 190, 296, 351(2), 115 (2) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत दर्ज किया गया है जो जमानतीय प्रकृति का है और धारा 140(3) भारतीय न्याय संहिता के अपराध के गठन के आवश्यक तत्व केस डायरी में नहीं है।

न्यायालय ने पाया कि अनुसंधान अधिकारी के द्वारा गलत धारा 140 (3) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत अभियुक्त का रिमांड लेने हेतु बिना उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों का पालन किये आवेदन प्रस्तुत किया गया है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अनुसंधान अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिमांड आवेदन माननीय न्यायालय द्वारा अस्वीकृत कर अभियुक्त मोह. नजरूल इस्लाम को रिमांड कार्यवाही से उन्मुक्त किया गया है।अभियुक्त को अनुसंधान कार्यवाही में सहयोग हेतु 10,000/- रूपये का बंधपत्र प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि अनुसंधान अधिकारी योगेश्वर कुमार वर्मा के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अर्नेश कुमार विरूद्ध बिहार राज्य एवं अन्य 02, में दिए गए निर्देशों के साथ सत्येन्द्र कुमार अंटील विरुद्ध सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन एवं अन्य में प्रतिपादित सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है।

गौर तलब है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सत्येन्द्र कुमार अंटील विरूद्ध सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन एवं अन्य में पुनः मिस्लेनियस एप्लीकेशन नंबर 2034/2022 इन MA 1849/2021 इन SLP ( criminal) नंबर 5191/2021 में अतिरिक्त निर्देश जारी किया गया है जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि यदि पुलिस के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो मजिस्ट्रेट के द्वारा प्रधान जिला न्यायाधीश को सूचित किया जाएगा और प्रधान जिला न्यायाधीश के द्वारा इसकी सूचना उच्च न्यायालय की ओर प्रेषित किया जाएगा। उपरोक्त दिशा निर्देशों के पालन के लिए आदेश पत्रिका की सत्य प्रतिलिपि प्रधान जिला न्यायाधीश दुर्ग, जिला-दुर्ग (छ०ग०) को प्रेषित की जानी है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता के मुताबिक न्यायालय के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किये जाने के लिए अनुसंधान अधिकारी योगेश्वर कुमार वर्मा के विरुद्ध उचित कार्यवाही किये जाने हेतु आवेश पत्रिका की सत्य प्रतिलिपि पुलिस महानिरीक्षक संभाग दुर्ग, जिला दुर्ग (छ०ग०) को प्रेषित किया जाना है।