वापस हो सकता है ग्रेच्युटी कटौती संबंधित एकतरफा आदेश, उप मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष प्रबंधन नहीं रख सका अपना पक्ष, ग्रेच्युटी मामले में प्रबंधन बैकफुट पर
भिलाई नगर 6 मार्च । कर्मियों के ग्रेच्युटी सीलिंग मामले में अब प्रबंधन बैकफुट पर आता हुआ नजर आ रहा है । इस मामले में हिंदुस्तान स्टील एम्प्लॉइज़ यूनियन सीटू द्वारा दायर परिवाद में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान प्रबंधन अपना पक्ष नहीं रख पाई ।
ज्ञात हो कि सेल प्रबंधन द्वारा 26 नवंबर 2021 को एकतरफा आदेश निकाल कर सेल कर्मियों के ग्रेच्युटी को भी अन्य उद्योगों के कर्मियों की तरह सीमित कर दिया गया था, जिसके खिलाफ सीटू ने स्थानीय स्तर पर परिवाद दायर किया था । इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई थी किंतु प्रबंधन अभी तक अपना पक्ष नहीं रख पाई है।
इस मामले में हिन्दुस्तान स्टील एम्पलॉइज़ यूनियन की ओर से सर्वप्रथम 29 नवंबर 2021 को प्रबंधन के पास लिखित आपत्ति दर्ज की गई, तत्पश्चात 4 दिसंबर 2021 को उप मुख्य श्रम आयुक्त के पास परिवाद दायर कर शिकायत की गई थी । परिवाद में यूनियन द्वारा कहा गया है कि सेल कर्मियों को इस्पात उद्योग के स्तर पर बनी द्विपक्षीय समिति एनजेसीएस समझौता के तहत असीमित ग्रेच्युटी प्राप्त होता है, और ‘ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972’ के अनुसार सेल कर्मियों को मिलने वाली इस सेवा निवृत्त पश्चात लाभ में परिवर्तन, समझौते के द्वारा ही संभव है। ग्रेच्युटी लाभ में कोई भी परिवर्तन या कटौती प्रबंधन के एकतरफा आदेश से नहीं हो सकता है।
प्रबंधन का टालमटोल रवैया
सीटू द्वारा दायर परिवाद पर पहली सुनवाई 27 जनवरी 2022 को रखी गई थी, जिसमें उप मुख्य श्रम आयुक्त ने प्रबंधन को अगली तिथि अर्थात 4 फरवरी 2022 को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था, किंतु प्रबंधन कॉर्पोरेट से दस्तावेज नहीं प्राप्त होने का बहाना बनाकर सुनवाई की तारीख को स्थगित करवाने का आग्रह किया। दो बार स्थगित करने के पश्चात 4 मार्च 2022 को पुनः सुनवाई हुई, जिसमें प्रबंधन और यूनियन दोनों पक्ष उपस्थित हुए, किंतु प्रबंधन की ओर से इस बार भी ना तो कोई दस्तावेज और ना ही यूनियन की दलील पर कोई प्रत्युत्तर दिया गया ।
वापस हो सकता है ग्रेच्युटी कटौती संबंधित एकतरफा आदेश
इस बीच यह संकेत मिल रहा है कि, प्रबंधन ग्रेच्युटी कटौती संबंधित अपने एकतरफा आदेश को वापस ले सकती है, किन्तु सीटू अपनी ओर से कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती हैं, क्योंकि संभव है कि प्रबंधन जिस दिन कटौती वापसी संबंधित आदेश जारी करेगी उस दिन तक सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को इस लाभ में शामिल नहीं किया जाएगा ।
परिवाद के अलावा अन्य विधिक विकल्पों पर भी सीटू द्वारा की जा रही है तैयारी
सीटू महासचिव एसपी डे ने बताया कि इस मामले में अन्य विधिक विकल्पों पर भी सीटू द्वारा कार्य किया जा रहा है, जैसे सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के नाम से ग्रेच्युटी दावा प्रकरण दायर करने पर भी विचार हो रहा है तथा कोलकाता उच्च न्यायालय में स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (इस्पात उद्योग में सीटू एवं अन्य स्वतंत्र ट्रेड यूनियनों का परिसंघ) द्वारा इस मामले में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है । सीटू को पूर्ण विश्वास है के इस मामले में अंततः जीत कर्मियों की ही होगी ।

