डीयू तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नॉलाजी, राची के मध्य होगा एमओयू

डीयू तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नॉलाजी, राची के मध्य होगा एमओयू


दुर्ग, 11 जून । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नॉलाजी, राची के मध्य एमओयू शीघ्र हस्ताक्षरित किया जायेगा। इस एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थाओं में अध्ययनरत् स्नातकोत्तर विद्यार्थियों हेतु प्रशिक्षण तथा अकादमिक एवं शोध के क्षेत्र में एक्सचेंज गतिविधियां आयोजित की जायेगी। पूर्णतः छात्रहित में किये जाने वाले इस एमओयू से विश्वविद्यालय में अध्ययनरत् लगभग 50 से अधिक स्नातकोत्तर महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को सीधा लाभ पहुंचेगा। यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में आज विश्वविद्यालय में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नॉलाजी, राची के ज्वाइंट डायरेक्टर, अकादमिक डॉ. किशोर कृष्नानी ने विश्वविद्यालय की कुलपति, डॉ. अरूणा पल्टा से विश्वविद्यालय में भेंट कर एमओयू के विभिन्न बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया।

विश्वविद्यालय की कुलपति, डॉ. अरूणा पल्टा ने बताया कि इससे पूर्व विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर की 06 संस्थाओं से एमओयू किया गया है। जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है। डॉ. पल्टा ने कहा कि छत्तीसगढ़ अंचल में बायोटेक्नॉलाजी के क्षेत्र में शोध कार्य करने एवं आधुनिक उपकरणों के सीमित संस्थानों में उपलब्धता है। जिसके कारण अनेक प्रतिभाशाली स्नातकोत्तर विद्यार्थी एवं पीएचडी शोधार्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विभिन्न अकादमिक गतिविधियों के आयोजन, शोध कार्यों में पारस्परिक सामंजस्य एवं अंचल के शोधार्थियों को वर्तमान में कृषि क्षेत्र में चल रही नई रिसर्च से अवगत कराने हेतु यह एमओयू हस्ताक्षरित किये जाने का विश्वविद्यालय प्रयास कर रहा है।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि जून माह में ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नॉलाजी, राची के डायरेक्टर अथवा ज्वाइंट डायरेक्टर तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव, भूपेन्द्र कुलदीप द्वारा यह महत्वपूर्ण एमओयू हस्ताक्षरित किया जायेगा। इस एमओयू का सीधा लाभ बायोलाजी क्षेत्र में अध्ययनरत् स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं पीएचडी शोधार्थियों को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान संकाय में लगभग 50 से अधिक शोधार्थी पीएचडी हेतु पंजीकृत है। पिछले माह विश्वविद्यालय ने अभ्युदय संस्थान, अछोटी के साथ एमओयू किया था इसका सीधा लाभ शिक्षा संकाय के शोधार्थियों को मिल रहा है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार विश्वविद्यालय नये शैक्षणिक सत्र में अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं से छात्रहित में एमओयू करने की योजना बना रहा है।