विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : डीयू की दो शोध छात्राएं बस्तर के कुटुमसर की गुफाएं एवं दलपत सागर के संरक्षण के लिए कर रही है शोध

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : डीयू की दो शोध छात्राएं बस्तर के कुटुमसर की गुफाएं एवं दलपत सागर के संरक्षण के लिए कर रही है शोध


दुर्ग 05 जून । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में पीएचडी हेतु पंजीकृत लगभग 1150 शोधार्थियों में से भूगर्भशास्त्र विषय की दो शोध छात्राएं कुमारी स्वपना गुप्ता तथा कुमारी अरूणिमा बसु रे बस्तर की प्रसिद्ध गुफाओं तथा जगदलपुर के समीप स्थित दलपत सागर तालाब के संरक्षण पर उल्लेखनीय शोधकार्य कर रही है। इन दोनों शोधार्थियों के शोधनिर्देशक हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के अधिष्ठाता छात्र कल्याण तथा प्रसिद्ध भूगर्भशास्त्री डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव तथा सहशोधनिर्देशक साइंस कॉलेज, दुर्ग के भूगर्भशास्त्र विभाग के डॉ. श्रीनिवास डी. देशमुख ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि यूजीसी के नये नियमों के मुताबिक शोधार्थियों द्वारा किये जा रहे शोध का सामाजिक हित में अनुप्रयोग आवश्यक है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए उक्त दोनों शोधार्थियों को बस्तर के पर्यावरण संरक्षण से दो पृथक-पृथक मुद्दों पर शोध कार्य आबंटित किया गया है।
बस्तर की चूनापत्थर की गुफाओं के संरक्षण पर शोधकार्य कर रही है कुमारी स्वपना गुप्ता के शोधपत्र प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से कांगेर वैली नेशनल पार्क के संरक्षण हेतु गठित समिति में भी कुमार स्वपना गुप्ता को शामिल किया गया है। कुमारी स्वपना गुप्ता ने बताया कि उनके द्वारा अभी तक बस्तर में कुटुमसर गुफा के आस-पास मिला 07 चूनापत्थर गुफाओं का सूक्ष्म अध्यन किया गया है। इनमें दंडक गुफा, ग्रीन गुफा, सहित एक नई गुफा भी शामिल है। वर्षा जल के चूनापत्थर क्षेत्रों में रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप् ये गुफाएं निर्मित हुई हैं तथा गुफा के अंदर अति मनमोहक चूनापत्थर से निर्मित संरचनाएं विद्यमान है। कुमारी स्वपना गुप्ता ने कहा कि लंबे भूवैज्ञानिक काल में (हजारों वर्ष) में निर्मित होने वाली इन महत्वपूर्ण संरचनाओं को कई बार पर्यटक जाने अनजाने में नुकसान पहुंचाते हैं गुफाओं के अंदर अत्यधिक अंधकार होने के कारण वहां विद्यमान चमगादड़ तथा मछलियां प्रकाश के प्रति असंवेदनशील होते हैं और लोग सामान्य रूप में उन्हें अंधा चमगादड़ अथवा अंधी मछली कहते हैं। कुमारी स्वपना गुप्ता के अपने शोधकार्य को बस्तर की गुफाओं के संरक्षण हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे इन गुफाओं की उत्पत्ति उपस्थित संरचना तथा जलवायु परिवर्तन का गुफाओं पर प्रभाव की जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
बस्तर में जगदलपुर के समीप स्थित दलपत सागर तालाब के यूट्रीफिकेशन अर्थात जल में सामान्य से अधिक उर्वरकों, प्रदूषकों तथा अपशिष्ट पदार्थों की उपस्थिति के निराकरण पर शोध कर रही साइंस कॉलेज, दुर्ग शोधकेन्द्र की शोधार्थी कुमारी अरूणिमा बसु रे ने कहा कि अपने शोधकार्य के दौरान उन्होंने पाया कि दलपत सागर तालाब के समीप शहरीकरण तथा मानव जनित गतिविधियों के कारण जल में आवश्यकता से अधिक पोषक तत्व विद्यमान है। बड़ी मात्रा में जलकुंभी की उपस्थिति तथा तालाब में उर्वरक खाद युक्त जल, औद्योगिक एवं घरेलू अपशिष्ट को प्रवाहित करने से दलपत सागर की जल की गुणवत्ता प्रभावित होगी। कुमारी अरूणिमा ने बताया कि उनका शोधकार्य अभी प्रगति पर है शोधकार्य पूर्ण होने पर वे समाज के हित में दलपत सागर के संरक्षण हेतु सुझाव देंगी।