छत्तीसगढ़ में होगी उच्च शिक्षा मिशन की स्थापना- आर.प्रसन्ना, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर ऑनलाईन कार्यशाला में 4500 से अधिक प्रतिभागी जुड़े

छत्तीसगढ़ में होगी उच्च शिक्षा मिशन की स्थापना- आर.प्रसन्ना, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर ऑनलाईन कार्यशाला में 4500 से अधिक प्रतिभागी जुड़े


दुर्ग, 01 जून । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर ऑनलाईन कार्यशाला में आज 4500 से अधिक प्रतिभागी जुड़े। कल 161 महाविद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस कार्यशाला के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन की स्थापना हेतु वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। इस मिशन के अंतर्गत उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न आवश्यकताएं जैसे प्रयोगशाला उपकरण, कैमिकल्स, स्मार्ट क्लास रूम, शोध संबंधी ग्रांट तथा कैंपस प्लेसमेंट जैसे सभी बिन्दुओं को शामिल किया जायेगा।


उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा 01 जून को दोपहर 12:30 बजे से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कियान्वयन तथा स्नातक स्तर के सत्र 2024-25 में प्रवेश प्रक्रिया संपादन आदि बिन्दुओं पर 161 महाविद्यालय के प्राचार्यों, प्राध्यापकों एवं प्रवेश प्रभारियों हेतु ऑनलाईन कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में ये उद्‌गार उच्च शिक्षा सचिव, आर. प्रसन्ना ने व्यक्त किये। श्री प्रसन्ना ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग इस प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है कि तीन हजार से छात्र संख्या वाले शासकीय महाविद्यालयों को प्रथम चरण में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया जाये। अपने संबोधन में श्री प्रसन्ना ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत समाहित स्कील डवलपमेंट आदि की सुविधाएं जो विभिन्न महाविद्यालयों में नहीं है उनके लिए उच्च शिक्षा विभाग संबंधित विभागों जैसे- कौशल विकास, पंचायत, ग्रामीण विकास, उद्योग विभाग आदि से समझौता कर इन पाठ्यक्रमों को पूर्ण करने का प्रयास करेगा। श्री प्रसन्ना ने कहा कि नये शैक्षणिक सत्र 2024-25 से महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरूद्ध अतिथि व्यख्याताओं के साथ-साथ लाइब्रेरियन, कीड़ा अधिकारी, प्रयोगशाला तकनीशियन एवं प्रयोगशाला परिचारक आदि की भी दैनिक वेतन भोगी के रूप में नियुक्ति किये जाना विचाराधीन है।


यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मनोनीत दो रिसोर्स पर्सन बिलासपुर के प्रोफेसर, जी. ए. घनश्याम, तथा डॉ. डी. के. श्रीवास्तव इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्रतिभागियों की समस्या का निराकरण किया। विश्वविद्यालय की कुलपति, डॉ. अरूणा पल्टा ने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस एक दिवसीय ऑनलाईन कार्यशाला में 4500 से अधिक प्राचार्यों, प्राध्यापकों, प्रवेश प्रभारियों तथा एनईपी प्रकोष्ठ समन्वयकों एवं कर्मचारियों की पूरे कार्यशाला के दौरान उपस्थिति को कार्यशाला की सफलता का प्रमाण बताया। कुलसचिव, भूपेन्द्र कुलदीप ने प्रारंभ में स्वागत भाषण तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला का संचालन विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने किया।


कार्यशाला में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मनोनीत रिसोर्स पर्सन डॉ. जी. ए. घनश्याम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप महाविद्यालयों में प्रवेश प्रकिया संपादन संबंधी जानकारी उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अगले सप्ताह तक जारी किये जाने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य प्राचीन गुरूकुल पद्धति को समाहित करते हुए नवीन पाठ्यक्रम का निर्माण करना है। यदि थ्योरी परीक्षा में कोई विद्यार्थी शामिल
होता है और उसे शून्य क्रेडिट अंक प्राप्त होते है परन्तु वह आंतरिक परीक्षा में उत्तीर्ण रहता
है तो उसे विद्यार्थी को अगले सेमेस्टर में जाने की पात्रता होगी। डॉ. घनश्याम ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बीए. बीएससी, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि में ही लागू की जा रही है। विधि तथा बीएड हेतु अभी नीति निर्धारित नहीं की गई है।

द्वितीय रिसोर्स पर्सन डॉ. डी के श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू होगा। प्रत्येक महाविद्यालय में एक घंटे का पीरियेड होगा। इसी के आधार पर क्रेडिट निर्धारित होंगे। थ्योरी हेतु एक क्रेडिट 15 घंटे का होगा। जबकि प्रायोगिक कक्षाओं के लिए एक क्रेडिट 30 घंटे का होगा। परीक्षार्थी को परीक्षा उत्तीर्ण करने हेतु न्युनतम 40 प्रतिशत् अंक लाना अनिवार्य है। परीक्षा उत्तीर्ण करने हेतु सैद्धांतिक परीक्षा एवं आंतरिक मूल्यांकन दोनों के अंक जोड़े जायेंगे। पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के बाद प्रश्नकाल में लगभग 50 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रश्न पुछकर अपनी जिज्ञासा शांत की तथा कार्यशाला को सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभप्रद बताया।