*विश्व ऑटिस्म जागरूकता दिवस पर विशेष : आटिज्म से पीड़ित बच्चो की मदद कर रही ऑक्यूपेशनल थेरेपी, भिलाई की जयश्री बनी ज़रिया, बीएसपी कर्मियों सहित भिलाई-दुर्ग के 250 बच्चो ले चुके उपचार*

*विश्व ऑटिस्म जागरूकता दिवस पर विशेष : आटिज्म से पीड़ित बच्चो की मदद कर रही ऑक्यूपेशनल थेरेपी, भिलाई की जयश्री बनी ज़रिया, बीएसपी कर्मियों सहित भिलाई-दुर्ग के 250  बच्चो ले चुके उपचार*


विश्व ऑटिस्म जागरूकता दिवस पर विशेष : आटिज्म से पीड़ित बच्चो की मदद कर रही ऑक्यूपेशनल थेरेपी, भिलाई की जयश्री बनी ज़रिया, बीएसपी कर्मियों सहित भिलाई-दुर्ग के 250  बच्चो ले चुके उपचार

भिलाई नगर 2 अप्रैल । प्रतिवर्ष 2 अप्रैल को दुनियाभर में वर्ल्ड ऑटिज्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाया जाता है. पूरे विश्व में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (Autism Spectrum Disorder) वाले लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उपाय करने के लिए संयुक्त राष्ट्र यह कार्यक्रम प्रायोजित करता है।ताकि इससे जूझ रहे लोगों के लिए अनुसंधान, निदान, उपचार और स्वीकृति जैसी चीजों में सहायता की जा सके।

आटिज्म एक मानसिक विकार है। इस रोग के शिकार बच्चे अधिक होते हैं। एक बार ऑटिज्म के चपेट के आने के बाद बच्चे का मानसिक विकास सामान्य बच्चो की तरह नही हो पाता । इस वजह से बच्चा परिवार और समाज से दूर रहने लगता है। इसका दुष्प्रभाव बड़े लोगों में अधिक देखने को मिलता है। ऑटिज्म ऑटिस्टिक डिसऑर्डर, एस्पर्गर सिंड्रोम, और परवेसिव डेवलपमेंटल डिसऑर्डर तीन प्रकार के होते हैं।

इस विकार से पीड़ित बच्चो की सहायता के लिए विभिन्न उपचार उपलब्ध है जो उन्हें सामान्य जीवन की ओर लाने में सहायक है। जिनमे से सबसे प्रमुख है ऑक्यूपेशनल थेरेपी। इस थेरेपी के माध्यम से बच्चो को  बच्चो की विभिन्न इंद्रियों को इंटेग्रिट करने के साथ लाइफ स्किल पर भी अच्छा खासा ध्यान दिया जाता है ताकि बच्चा सामान्य जीवन मे वापस आ सके।

 ऑक्यूपेशनल थेरेपी सामान्य थेरेपी से अलग है जिसके कारण इसके जानकार भी बहुत कम होते है। इन ही थेरेपिस्ट में से एक  भिलाई सेक्टर 4 में निवासरत जयश्री त्रिवेदी है इनके द्वारा ऑक्यूपेशनल थेरेपी की सहायता से इन विकार से पीड़ित बच्चो की लगातार सहायता की जा रही है। 

एक लघु चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि  विगत चार सालों से सेक्टर 2 ए मार्केट स्थित उनका कल्याणी नवजीवन मल्टीथेरेपी सेंटर आटिज्म, एडीएचडी, डाउन सिंड्रोम जैसे  विकारों से पीड़ित बच्चो की सहायता करने की कोशिश कर रहा है। जहाँ भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव के साथ साथ छत्तीसगढ़ के दूरस्त इलाको से भी आकर माता पिता अपने बच्चो को थेरेपी दिलवा रहे है। एक ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट मानसिक या शारीरिक रोग या अक्षमता से ग्रस्त लोगों की सहायता करके उन्हें सामान्य जीवन जीने और जितना संभव हो सक्रिय बनाने का प्रयास करते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट लोगों को जीवन जीने की स्किल्स सिखाते हैं जो एक उद्देश्यपूर्ण और संतोषजनक जीवन जीने के लिए जरूरी हैं। ये रोगियों को सेंसरी, मोटर, परसेप्चुअल और कॉग्नेटिव एक्टिविटीज के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के सामान्य कार्य करने और काम पर लौटने में सक्षम बनाते हैं। ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट कई तरह के रोगों और डिसऑर्डर्स के उपचार में अपनी भूमिका निभाते हैं जिनमें देरी से होने वाला विकास, लर्निंग डिसऑर्डर, ऑटिज्म, लकवा, रीढ़ की हड्‌डी और मस्तिष्क की चोट, आर्थराइटिस , डिप्रेशन, शिजोफ्रेनिया, डिमेंशिया और पार्किंसन्स जैसी समस्याएं शामिल हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत कर्मियों के बच्चो सहित 250 से ज्यादा बच्चे अब तक इस केंद्र द्वारा सहायता प्राप्त कर चुके है।